नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । देशभर में दिवाली का त्योहार बड़े उत्साह, भक्ति और उमंग के साथ मनाया जाता है। हर साल यह पर्व कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है, और इस बार दिवाली आज 20 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन घरों को दीपों से सजाया जाता है और शाम के शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। लोग मां लक्ष्मी से अपने घर में समृद्धि और सौभाग्य लाने की प्रार्थना करते हैं।
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की संयुक्त पूजा की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को धन, बुद्धि और समृद्धि तीनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। दरअसल, लक्ष्मी जी धन की देवी हैं, वहीं गणेश जी को विघ्नहर्ता और बुद्धि का देवता माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि अगर लक्ष्मी जी बिना गणेश जी के घर आएं, तो वह धन स्थायी नहीं रहता। इसी कारण दिवाली पर लक्ष्मी के साथ गणेश की पूजा को अनिवार्य माना गया है। इस विश्वास के पीछे एक पौराणिक कथा भी है, जो इस परंपरा को और गहराई देती है। आइए जानते हैं वह कथा क्या है…
क्या है लक्ष्मी-गणेश पूजा से जुड़ी पौराणिक कथा?
महापुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार, एक समय माता लक्ष्मी अपने सौंदर्य, वैभव और प्रसिद्धि को लेकर गर्व से भर गई थीं। उन्हें इस बात का अभिमान हो गया कि संसार का हर व्यक्ति केवल उनकी कृपा पाने के लिए व्याकुल रहता है। जब भगवान विष्णु ने यह देखा तो उन्होंने माता लक्ष्मी से कहा कि यद्यपि संसार के लोग तुम्हें पाने के लिए व्याकुल हैं, लेकिन तुम्हारे पास संतान नहीं है और इसी कारण तुम स्वयं भीतर से अधूरी हो। यह सुनकर माता लक्ष्मी को गहरा दुःख हुआ। उन्होंने अपनी व्यथा माता पार्वती को बताई। तब माता पार्वती ने लक्ष्मी जी की भावना को समझते हुए अपने पुत्र भगवान गणेश को उनकी गोद में बैठा दिया। इसके बाद से ही गणेश जी को माता लक्ष्मी का दत्तक पुत्र माना जाने लगा। लक्ष्मी जी गणेश जी को गोद में पाकर अत्यंत प्रसन्न हुईं और उन्होंने आशीर्वाद दिया कि जो भी मेरी पूजा करेगा, वह पहले मेरे पुत्र गणेश की पूजा करेगा। तभी से दिवाली के शुभ अवसर पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा की परंपरा चलती आ रही है।
लक्ष्मी-गणेश की संयुक्त पूजा की एक और महत्वपूर्ण वजह
दिवाली के दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की संयुक्त पूजा केवल पौराणिक मान्यता पर ही आधारित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी प्रतीकात्मकता भी है। माता लक्ष्मी को जहां धन और समृद्धि की देवी माना जाता है, वहीं भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और सफलता का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जब व्यक्ति के जीवन में अचानक धन आता है, तो वह अक्सर अहंकार या भ्रम का शिकार हो जाता है। इसलिए लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा यह संदेश देती है कि धन के साथ विवेक जरूरी है। गणेश जी का आशीर्वाद व्यक्ति को यह शक्ति देता है कि वह धन का सही उपयोग कर सके और जीवन में संतुलन, समझदारी और विनम्रता बनाए रखे।
(Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते है।)





