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Friday, April 10, 2026
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कब रखा जाएगा राधा अष्टमी का व्रत 30 या 31 अगस्त? जानें सटीक तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

राधा अष्टमी भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को मनाया जाता है, यह श्री राधा रानी के जन्मोत्सव का पर्व है, इस दिन भक्त व्रत, पूजन और भजन-कीर्तन के साथ राधा-कृष्ण की भक्ति में लीन होते हैं।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा रानी के जन्मोत्सव के रूप में राधा अष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। यह दिन राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु इस अवसर पर व्रत रखकर भक्ति भाव से पूजन करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

इस बार राधा अष्टमी का पर्व 31 अगस्त, रविवार को मनाया जाएगा। जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत विधि और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।

राधा अष्टमी 2025: तिथि और मुहूर्त

अष्टमी तिथि प्रारंभ: 30 अगस्त 2025, रात 10:46 बजे

अष्टमी तिथि समाप्त: 31 अगस्त 2025, रात 12:57 बजे

पर्व मनाने की तिथि: 31 अगस्त (सूर्योदय के अनुसार)

पूजन का शुभ मुहूर्त: सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक

 राधा अष्टमी व्रत और पूजा विधि

रविवार की सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। राधा-कृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। दीप जलाकर धूप, चंदन, पुष्प और माखन-मिश्री से राधा रानी की विधिपूर्वक पूजा करें।

मंत्र जाप

श्रद्धालु इस दिन “ॐ राधायै नमः” मंत्र का जाप करें। राधा रानी के 108 नामों का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।

 व्रत के नियमों का रखें ध्यान

व्रत के दिन केवल फलाहार या एक समय सात्विक भोजन करें

तामसिक भोजन, प्याज-लहसुन और मांस-मदिरा से पूरी तरह बचें

दिन में सोने से परहेज करें

मन, वाणी और कर्म को संयमित रखें

क्रोध, झूठ और बुरे विचारों से दूर रहें

राधा अष्टमी का धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राधा जी का जन्म बरसाना में भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को हुआ था। उन्हें श्रीकृष्ण की आत्मा का अंश माना जाता है। जो श्रद्धालु राधा अष्टमी का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करते हैं, उनके जीवन में प्रेम, शांति और समृद्धि का वास होता है।

 मंदिरों में होंगे विशेष आयोजन

राधा अष्टमी के अवसर पर वृंदावन, बरसाना और मथुरा के मंदिरों में विशेष कार्यक्रम और झांकियां सजाई जाएंगी। श्रद्धालु भजन-कीर्तन के माध्यम से राधा रानी की भक्ति में लीन रहेंगे। राधा अष्टमी के दिन केवल व्रत और पूजा ही नहीं, बल्कि सच्चे मन से सेवा, भक्ति और प्रेम का प्रतीक है।

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