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Sawan 2025: सावन में कब रखा जाएगा कामिका एकादशी व्रत, जाने पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

सालभर में कुल 24 एकादशियां आती हैं, और प्रत्येक का अपना विशेष महत्त्व होता है। सावन माह की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है

नई दिल्ली , रफ्तार डेस्क । सनातन धर्म में एकादशी तिथि का अत्यंत पावन और पुण्यदायी स्थान है। यह दिन भगवान विष्णु की भक्ति, उपासना और साधना के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि जो भक्त एकादशी पर सच्चे मन से उपवास और पूजन करते हैं, उन्हें भगवान श्रीहरि की कृपा से जीवन की समस्त बाधाओं से मुक्ति और सुख-शांति का वरदान प्राप्त होता है।

सालभर में कुल 24 एकादशियां आती हैं, और प्रत्येक का अपना विशेष महत्त्व होता है। सावन माह की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है — यह व्रत विशेष रूप से पापों के नाश और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग माना गया है।

कामिका एकादशी 2025 कब है?

एकादशी तिथि प्रारंभ: 20 जुलाई 2025, रविवार, दोपहर 12:12 बजे

तिथि समाप्त: 21 जुलाई 2025, सोमवार, सुबह 09:38 बजे

उदयातिथि के अनुसार व्रत तिथि: 21 जुलाई 2025, सोमवार

व्रत पारण (व्रत खोलने का दिन): 22 जुलाई 2025, मंगलवार

कामिका एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

स्कंद पुराण के अनुसार, कामिका एकादशी व्रत के पुण्य से तीर्थस्नान, दान, यज्ञ और तप के बराबर फल प्राप्त होता है।

यह व्रत विशेष रूप से पितृ दोष, नकारात्मक ऊर्जा, और चिंताओं को दूर करने में सहायक माना जाता है।

कामिका एकादशी पर व्रत करने से मन को शुद्धि और आत्मा को शांति प्राप्त होती है।

व्रत विधि और नियम (Fasting Rules):

1. व्रत से एक दिन पहले (दशमी तिथि को) सात्विक आहार लें और चावल का सेवन न करें।

2. एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें।

3. तुलसी पत्र, पंचामृत, दीप और धूप से श्रीहरि का पूजन करें।

4. दिनभर उपवास रखें — फलाहार ले सकते हैं।

5. श्री विष्णु सहस्त्रनाम या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।

6. रात्रि में जागरण एवं भजन-कीर्तन करें।

जुलाई से दिसंबर 2025 तक आने वाली प्रमुख एकादशी तिथियां

 तिथि : एकादशी नाम

06 जुलाई- देवशयनी एकादशी

21 जुलाई -कामिका एकादशी

05 अगस्त- श्रावण पुत्रदा एकादशी

19 अगस्त -अजा एकादशी

03 सितंबर – परिवर्तिनी एकादशी

17 सितंबर – इन्दिरा एकादशी

03 अक्टूबर -पापांकुशा एकादशी

17 अक्टूबर -रमा एकादशी

02 नवंबर- देवोत्थान एकादशी

15 नवंबर- उत्पन्ना एकादशी

01 दिसंबर -मोक्षदा एकादशी

15 दिसंबर- सफला एकादशी

30 दिसंबर -पौष पुत्रदा एकादशी

विशेष सलाह: एकादशी व्रत को पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करना चाहिए। यह न केवल धर्मिक दृष्टिकोण से पुण्यदायक है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धता के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।

Disclaimer: उपरोक्त जानकारी धार्मिक ग्रंथों और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। किसी विशेष व्रत या पूजन से पहले योग्य आचार्य या ब्राह्मण से परामर्श लेना श्रेष्ठ होता है।

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