नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यंत पुण्यदायक महत्व है। साल भर में आने वाली 24 एकादशियों में से आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित होता है और धर्मग्रंथों के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से मनुष्य को पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस लेख में हम जानेंगे कि योगिनी एकादशी 2025 में कब पड़ रही है, इसका शुभ मुहूर्त, पूजा की सही विधि, और इस व्रत का धार्मिक महत्व क्या है।
योगिनी एकादशी 2025 में कब है?
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 21 जून को सुबह 7 बजकर 18 मिनट पर होगा। यह तिथि 22 जून को सुबह 4 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि व्रत हमेशा उदया तिथि के अनुसार रखा जाता है, इसलिए योगिनी एकादशी का व्रत 21 जून 2025 को रखा जाएगा।
योगिनी एकादशी की पूजा विधि
योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विशेष आराधना की जाती है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि कर्म संपन्न कर लें। उसके बाद भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर या पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करके गंगाजल से शुद्ध करें। एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं और उस पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। भगवान विष्णु का पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद हल्दी और कुमकुम से भगवान विष्णु के माथे पर तिलक लगाएं और पीले फूल अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर धूप दिखाएं।
भगवान विष्णु को फल, मिठाई और तुलसी के पत्ते अर्पित करें। योगिनी एकादशी की कथा का श्रवण करें। इसके बाद भगवान विष्णु सहित अन्य देवी-देवताओं की आरती करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। इस दिन व्रती को संपूर्ण दिन निर्जल व्रत रखना चाहिए, लेकिन यदि संभव न हो तो फलाहार लिया जा सकता है। रात्रि में जागरण कर भगवान विष्णु के भजन और कीर्तन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
योगिनी एकादशी का महत्व
योगिनी एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस व्रत का फल 88,000 ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान होता है। इस व्रत को करने वाला व्यक्ति अपने पिछले जन्मों के पापों से भी मुक्त हो जाता है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का अनुभव करता है। पद्म पुराण में भी कहा गया है कि योगिनी एकादशी का व्रत सभी प्रकार के रोग, पाप और मानसिक परेशानियों को दूर करता है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी है जो मानसिक, शारीरिक या आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे होते हैं।
Disclaimer : इस लेख में शामिल जानकारी धार्मिक आस्थाओं पर आधारित है। हम इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करते है।




