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Thursday, March 19, 2026
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इस सावन मास में कब पड़ रही Sawan Shivratri? जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

सावन का महीना भगवान शिव का सबसे प्रिय माना जाता है, इस महीने ही भगवान शिव को माता पार्वती ने कई वर्षों के बाद कठिन तपस्या के बाद वर रुप में प्राप्त किया था। आज जानेगें सावन शिवरात्रि कब पड़ रही है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सावन का महीना भगवान शिव का सबसे प्रिय मास माना जाता है, इस महीने ही भगवान भोलेनाथ को माता पार्वती ने कई वर्षो के जन्म के उपरांत अपने 108 वें वर्ष के जन्म के बाद कठिन तपस्या के बाद बाबा भोलेनाथ को पति रुप में प्राप्त किया था। इसलिए इस मास को पूजा पाठ की दृष्‍टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। आज जानेगें भगवान को प्रसन्न करने सावन शिवरात्रि के पूजा के मह्त्व के बारे में व उसकी पूजा विधि शुभ मुहूर्त। 

सावन का पूरा महीना भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने बेहद खास माना जाता है इस पूरे महीने सभी भक्तगण शिवलिंग पर जल चढ़ाकर, व्रत रखकर और रुद्राभिषेक कर भोलेनाथ को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने की कोशिश करते हैं। लेकिन इस पूरे माह में सबसे विशेष दिन सावन शिवरात्रि का होता है, जो कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है। इस दिन मान्यता है कि जो भक्त इस दिन श्रद्धा और विधिपूर्वक शिवजी की आराधना करते हैं, उनके जीवन से हर तरह के संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि आती है। आइए जानते हैं इस बार सावन शिवरात्रि किस तारीख को पड़ रही है। 

सावन शिवरात्रि 2025 कब है 

हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण मास की चतुर्दशी तिथि इस बार 23 जुलाई 2025 को सुबह 04:39 बजे से आरंभ होगी, जो अगले दिन यानी 24 जुलाई 2025 को सुबह 02:28 बजे तक रहेगी। अर्धरात्रि की पूजा 23 जुलाई को ही होगी। इसलिए सावन शिवरात्रि का व्रत और पूजन बुधवार, 23 जुलाई 2025 को किया जाएगा। इस दिन चार प्रहर में शिव पूजा करना विशेष फलदायक माना गया है। 

सावन शिवरात्रि 2025 के खास मुहूर्त

अर्धरात्रि की पूजा मुहूर्त: रात 11:52 बजे से 12:48 बजे तक

पूजा की अवधि: 56 मिनट

व्रत पारण समय: 24 जुलाई सुबह 5:27 बजे के बाद

चार प्रहर का पूजा समय 

प्रथम प्रहर- शाम 6:59 से रात 9:36 तक

द्वितीय प्रहर- रात 9:36 से 12:13 तक

तृतीय प्रहर- रात 12:13 से 2:50 तक

चतुर्थ प्रहर- 2:50 से 5:27 तक

सावन शिवरात्रि पर शिव पूजा की विधि 

1. सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें। 

2. गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर यानी पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें। 

3. बेलपत्र, भांग, धतूरा, सफेद फूल, चंदन, फल और धूप-दीप अर्पित करें। 

4. ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जाप करें। 

5. रात्रि जागरण करें. रातभर शिव भजन, स्तोत्र या शिव पुराण का पाठ करें। 

6. अगले दिन शुभ मुहूर्त पर व्रत का पारण करें। 

सावन शिवरात्रि का धार्मिक महत्व 

सावन शिवरात्रि सिर्फ व्रत करने का दिन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है, शिव पुराण के अनुसार, इस दिन शिवजी के साथ-साथ माता पार्वती की भी पूजा करनी चाहिए। यह रात शिव और शक्ति के एकत्व के प्रतीक का दिन होता है। विवाहित स्त्रियां इस दिन अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। व कुवांरी कन्या अच्छे वर की प्राप्ति के लिए व्रत करती हैं। सभी भक्त रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण से शिवजी को प्रसन्न करते है। कांवड़ यात्रा भी सावन के इसी समयमें होती है, जब शिवलिंग पर पवित्र जल चढ़ाकर भक्त मोक्ष की कामना करते हैं। 

क्या सावन शिवरात्रि का व्रत सभी रख सकते हैं

सावन शिवरात्रि का व्रत स्त्री-पुरुष, बुजुर्ग, युवा, विवाहित और अविवाहित सभी रख सकते हैं, यह व्रत तन और मन ही नहीं आत्मा को भी शुद्ध करता है। 

व्रत के दौरान क्या न करें

दिनभर गुस्सें व अपशब्द कहने से बचें। 

अन्न का सेवन ना करने के बजाय सिर्फ फलाहार या जल पर रहें। 

तामसिक भोजन जैसें,लहसून, प्याज, मांसाहार, नशा भोजन पूरी तरह त्याग दें।

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