नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । हिंदू धर्म में विशेष रुप से माना जानेंवाला निर्जला एकादशी व्रत बहुत पावन माना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है इसमें निर्जला व्रत रखने का विधान है। यह व्रत सबसे कठिन एकादशी में से एक माना जाता है, इसलिए इसके नियमों का पालन करना बहुत जरुरी होता है ताकि आपका व्रत खंडित न हो और आपको इसका पूरा फल प्राप्त हो सके, तो चलिए इस दिन से जुड़े नियमों के बारे में जानते हैं।
निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु और लक्षमी के पूजा का विधान है जिसमें इस व्रत को रखने से पहले कुछ विशेषों का ध्यान रखना बेहद जरुरी होता है। एकादशी व्रत रखने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। तो आइए जानते है इस पूरे आर्टिकल से पूरी जानकारी।
निर्जला एकादशी 2025 कब है?
निर्जला एकादशी ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी 6 जून को रात 2 बजकर 15 मिनट पर शुरुवात होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 7 जून सुबह 4 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा। इसलिए इस निर्जला एकादशी को 6 जून को रखा जाएंगा।
निर्जला एकादशी 2025 व्रत के नियम
इस दिन किसी भी प्रकार के अन्न खाने की मनाही होती है विशेषकर चावल की इस व्रत में व्रती को फलाहार रहना चाहिए। जिसमें अनार व हरे पत्तेदार सब्जियों कासेवन भी नही करना चाहिए।
मन पर रखें काबू – इस व्रत के दौरान मन को शांत और शुद्ध रखना जरुरी होता है। साथ ही किसी के प्रति बुरे विचार नहीं लाने चाहिए और गुस्से में तीखा बोलने से बचना चाहिए।
व्रत के लाभ
निर्जला एकादशी का व्रत बेहद पुण्यदायी माना जाता है और इसे सभी एकादशी में से श्रेष्ठ माना जाता है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं, मान्यता अनुसार, भीम ने इसी व्रत का पालन करके सभी एकादशी का पुण्य प्राप्त किया था।ऐसा कहते है कि, इस व्रत का भाव के साथ पालन करने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है साथ ही जीवन में सुख शांति आती है।





