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Friday, March 20, 2026
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वसंत पंचमी पूजा व्रत विधि- Vasant Panchami Pooja Vrat Vidhi in Hindi

देवीभागवत के अनुसार देवी सरस्वती की पूजा सर्वप्रथम भगवान श्री कृष्ण ने की थी। मान्यतानुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि जिसे वसंत पंचमी (Vasant Panchami) के नाम से जाना जाता है, के दिन विद्यारंभ के शुभ अवसर पर देवी सरस्वती की पूजा करनी चाहिए।

वसंत पंचमी (Vasant Panchami)

इस वर्ष वसंत पंचमी 5 फरवरी, 2022 को मनाई जाएगी। इस दिन सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:42 मिनट से लेकर 12:36 मिनट तक है। (नोट: मुहूर्त दिल्ली समयानुसार है)। लोकप्रिय आस्था के अनुसार ज्ञान संगीत कला  विज्ञान और प्रौद्योगिकी की देवी – देवी सरस्वती – इस दिन पैदा हुई थी और लोग ज्ञान प्राप्त करने के लिए देवी सरस्वती की इस दिन पूजा करते है।

वसंत पंचमी एक लोकप्रिय हिंदू त्योहार है जो वसंत की शुरुआत पर मनाया जाता है। पंजाब क्षेत्र में यह वसंत के पांचवें दिन पतंग के त्योहार के रूप में मनाया जाता है। इस दिन देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह श्री पंचमी के रूप में भी जाना जाता है। पीले कपड़े पहनना और मीठे चव्हाल और बूंदी के लाडू जैसे खाद्य पदार्थों को खाना बनाना इस त्यौहार के मुख्य आकर्षण है।

सरस्वती व्रत की विधि (Vasant Panchami Puja Vidhi in Hindi)

इस दिन मां सरस्वती की पूजा करनी चाहिए। प्रात: काल समस्त दैनिक कार्यों से निवृत्त होने के पश्चात मां भगवती सरस्वती की आराधना का प्रण लेना चाहिए। इसके बाद दिन के समय यानि पूर्वाह्नकाल में स्नान आदि के बाद भगवान गणेश जी का ध्यान करना चाहिए। स्कंद पुराण के अनुसार सफेद पुष्प, चन्दन, श्वेत वस्त्रादि से देवी सरस्वती जी की पूजा करनी चाहिए। पूजा के उपरांत देवी को दण्डवत प्रणाम करना चाहिए।

सुबह के अनुष्ठान

पूजा करने वाले व्यक्ति को सुबह विशेष रूप से औषधीय पानी के साथ स्नान करना चाहिए। स्नान के पानी में नीम और तुलसी के पत्ते होने चाहिए। स्नान करने से पहले, व्यक्ति को अपने शरीर पर नीम और हल्दी के मिश्रण का लेप लगाना चाहिए। इस अनुष्ठान से शरीर को शुद्ध किया जाता है और यह सभी प्रकार के संक्रमणों से रक्षा भी करता है। स्नान करने के बाद व्यक्ति को या तो सफेद या पीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए।

देवी सरस्वती की मूर्ति की स्थापना और कलश

जहां आप मूर्ति को रखने की योजना बना रहे हैं वहाँ पर अच्छे से सफाई कर ले। एक मंच पर सफ़ेद कपड़ा फेला दें। मूर्ति इस मंच पर रखें और उसका हल्दी कुमकुम चावल माला और फूलों के साथ श्रृंगार करें। मूर्ति के पास किताबें या संगीत वाद्ययंत्रों को रखें। कलश को पानी से भरें पांच आमों के पत्तों को उस जगह रखे और उसके ऊपर सुपारी का पत्ता रख दीजिये। इसकी इलावा देवी सरस्वती के पास भगवान गणेश की मूर्ति रखें।

देवी सरस्वती का मंत्र (Devi Sarasvati Mantra)

सरस्वती जी की पूजा के लिए अष्टाक्षर मूल मंत्र “श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा” परम श्रेष्ठतम और उपयोगी है।

विशेष (Important)

देवी सरस्वती की पूजा में श्वेत वर्ण का अहम स्थान होता है। इनको चढ़ाने वाले नैवेद्य व वस्त्र अधिकतर श्वेत वर्ण के ही होने चाहिए।

सरस्वती पूजा के दिन मां शारदा यानि सरस्वती जी की आरती और चालीसा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: 

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