back to top
27.1 C
New Delhi
Friday, March 27, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Tulsi Vivah 2025: शुभ योग में होगा तुलसी विवाह! कब है सबसे उत्तम समय?

तुलसी विवाह देवी तुलसी और भगवान शालिग्राम को समर्पित एक पावन पर्व है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस वर्ष यह शुभ उत्सव 2 नवंबर को मनाया जाएगा।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की शुक्ल द्वादशी को तुलसी विवाह पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। देवउठनी एकादशी के अगले दिन होने वाले इस पर्व से शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-अर्चना हुई।

तुलसी विवाह 2025 कब?

द्रिक पंचांग के अनुसार, 2025 में कार्तिक शुक्ल द्वादशी तिथि 2 नवंबर को सुबह 7:31 बजे शुरू होकर 3 नवंबर को सुबह 5:07 बजे तक रहेगी। ऐसे में तुलसी विवाह 2 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन भक्त घर-घर में व्रत, विशेष पूजन और विवाह की रस्में निभाएंगे।

तुलसी विवाह का मूल भाव देवी तुलसी और भगवान शालिग्राम के दिव्य मिलन का उत्सव है। इसमें विवाह की सभी रस्में मंडप सजाना, कन्यादान और सात फेरे परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ की जाती हैं, जैसे किसी वास्तविक विवाह समारोह में होती हैं।

तुलसी विवाह का धार्मिक महत्व

शुभ कार्यों की शुरुआत

देवउठनी एकादशी के बाद जब भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं, तभी से विवाह, गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। तुलसी विवाह इसी शुभ आरंभ का प्रतीक है, जिसे श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया जाता है।

सौभाग्य की प्राप्ति

मान्यता है कि, तुलसी विवाह कराने वाले परिवारों में सुख-समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है। इस व्रत और आयोजन से भगवान विष्णु और तुलसी माता की कृपा प्राप्त होती है, जिससे संतान सुख की भी प्राप्ति संभव मानी जाती है।

पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी विवाह करने से व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। यह पुण्य फलदायी कर्म माना गया है, जिससे मोक्ष की प्राप्ति होती है और आत्मा को शांति मिलती है।

तुलसी विवाह की पूजा विधि: 

तुलसी विवाह के दिन सबसे पहले घर की साफ-सफाई कर तुलसी के पौधे को पवित्र स्थान पर स्थापित करें। फिर तुलसी माता का श्रृंगार करें। उन्हें लाल वस्त्र पहनाएं, कुमकुम, हल्दी, फूल और चूड़ा चढ़ाएं। तुलसी के बाईं ओर भगवान शालिग्राम को स्थापित करें। तुलसी में जल अर्पित करें और सिंदूर, पुष्प व मिठाइयों के साथ 16 श्रृंगार समर्पित करें। अंत में आरती करें और प्रसाद ग्रहण कर पूजा संपन्न करें।

Advertisementspot_img

Also Read:

spot_img

Latest Stories

Peddi Pehelwan की पहली झलक में दंगल करते दिखे Ram Charan, आज जन्मदिन पर रिलीज हुआ टीजर

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आज एक्टर रामचरण (Ram Charan)...

IPL Records: IPL में रनों की बरसात! जानिए किन मैचों में बने अब तक के सबसे बड़े स्कोर

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। Indian Premier League (IPL) को दुनिया...
⌵ ⌵ ⌵ ⌵ Next Story Follows ⌵ ⌵ ⌵ ⌵