नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । निर्जला एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत विशेष माना जाता है। इसे वर्ष की सबसे कठिन और सबसे पुण्यदायी एकादशी माना जाता है। मान्यता है कि इस एक व्रत को विधिपूर्वक करने से वर्षभर की सभी 24 एकादशियों का पुण्य प्राप्त हो जाता है। वर्ष 2025 में यह व्रत दो दिनों तक मनाया जाएगा। पहले दिन स्मार्त निर्जला एकादशी का पालन किया जाएगा, जबकि दूसरे दिन वैष्णव निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। निर्जला एकादशी का उपवास लगभग 32 घंटे लंबा होता है, जो इसे सबसे कठिन व्रतों में से एक बनाता है। आइये जानते हैं इस व्रत की तिथि, पूजा विधि और आवश्यक नियमों के बारे में…
कब है निर्जला एकादशी ?
दृक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2025 में निर्जला एकादशी की तिथि 6 जून 2025 को सुबह 2:15 बजे आरंभ होगी और 7 जून 2025 को सुबह 4:47 बजे समाप्त होगी। वहीं, हरि वासर का समापन 7 जून 2025 को सुबह 11:25 बजे होगा। इस प्रकार 6 जून 2025, शुक्रवार को स्मार्त निर्जला एकादशी व्रत रखा जायेगा। जबकि 7 जून 2025, शनिवार को वैष्णव निर्जला एकादशी व्रत। गृहस्थ जीवन जीने वाले व्रती के लिए यह उपवास लगभग 32 घंटे 21 मिनट तक चल सकता है। व्रत की शुरुआत सूर्योदय से होगी और यह पारण (व्रत तोड़ने) के निर्धारित समय तक जारी रहेगा।
निर्जला एकादशी व्रत : नियम और विधि
निर्जला एकादशी को वर्ष की सबसे कठिन एकादशियों में गिना जाता है, क्योंकि इस व्रत में जल और अन्न दोनों का पूर्ण रूप से त्याग किया जाता है। इस दिन व्रती को संयम और श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए तथा व्रत का पालन विधिपूर्वक करना आवश्यक होता है।
क्या करें इस दिन :-
– प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ, पवित्र वस्त्र धारण करें।
– भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
– पूरे दिन निराहार और निर्जल रहकर उपवास का पालन करें।
– भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
– गरीबों को अन्न, जल और वस्त्र का दान करें तथा ब्राह्मणों को भोजन करवाएं।
स्मार्त और वैष्णव निर्जला एकादशी में क्या अंतर है?
जब निर्जला एकादशी व्रत दो दिनों तक पड़ता है, तब पहले दिन स्मार्त व्रत और दूसरे दिन वैष्णव व्रत करने की परंपरा मानी जाती है। स्मार्त व्रत आमतौर पर गृहस्थ जीवन जीने वाले साधारण श्रद्धालुओं द्वारा रखा जाता है। जबकि वैष्णव व्रत मुख्यतः वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी विशेष विधि और नियमों के साथ करते हैं। हालांकि गृहस्थ जन चाहें तो वैष्णव एकादशी का व्रत भी रख सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें वैष्णव परंपरा से जुड़ी नियमावली का पालन करना आवश्यक होता है।
निर्जला एकादशी व्रत के लाभ
– इस व्रत को करने से वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता है।
– भगवान विष्णु की आराधना करने से समस्त पापों का नाश होता है।
– निर्जला एकादशी का व्रत व्यक्ति को विष्णु लोक में स्थान दिलवाता है।
– यह व्रत व्यक्ति को मानसिक शांति, संयम और शारीरिक शुद्धता की प्रेरणा देता है।
– इस दिन दान करने से पुण्य लाभ प्राप्त होता है। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जल दान करना विशेष फलदायी माना जाता है।
निर्जला एकादशी व्रत का पारण समय 2025
निर्जला एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के समापन के बाद किया जाता है। स्मार्त व्रत पारण 7 जून 2025, दोपहर 1:44 बजे से लेकर 4:31 बजे तक होगा। जबकि वैष्णव व्रत पारण 8 जून 2025, सुबह 5:23 बजे से लेकर 7:17 बजे तक होगा।
निर्जला एकादशी व्रत का महत्व
निर्जला एकादशी का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसे करने से व्यक्ति के समस्त पापों का नाश हो जाता है। यह व्रत खास तौर पर भीमसेन द्वारा किया गया था, क्योंकि वे अन्य एकादशियों का पालन नहीं कर पाते थे। इसी कारण इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को मृत्यु के बाद विष्णु लोक की प्राप्ति होती है और साथ ही यह मानसिक और शारीरिक शुद्धि के लिए भी लाभकारी माना जाता है।





