नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । सावन का महीना चल रहा है। इस शुभ अवसर पर उत्तरप्रदेश के सहारनपुर में सावन के पवित्र महीने में आस्था, इतिहास और श्रद्धा का अद्वितीय संगम देखने को मिल रहा है। मंडी समिति रोड पर स्थित 300 साल पुराने मराठा कालीन सिद्ध पीठ गोटेश्वर महादेव मंदिर में इस बार सोने के लोटे से भगवान शिव का जलाभिषेक किया जा रहा है।
मंदिर का इतिहास मराठा शासनकाल से जुड़ा है इतिहास
मंदिर समिति द्वारा विशेष रूप से तैयार कराए गए 250 ग्राम के स्वर्ण कलश की अनुमानित कीमत 23 लाख (आज के मूल्य के हिसाब से, 22 कैरेट में) बताई जा रही है। इस मंदिर का इतिहास मराठा शासनकाल से जुड़ा हुआ है। लगभग तीन शताब्दियों पहले निर्मित यह मंदिर कुछ समय पहले तक वीरान पड़ा रहा।
2020 में खोला गया पट
वर्ष 2020 में तत्कालीन जिलाधिकारी अखिलेश सिंह की पहल और हिंदू संगठनों के संघर्ष के बाद इस मंदिर के पट एक बार फिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। प्रशासन द्वारा कुछ स्थानीय पंडितों को इसकी पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी सौंपी गई।
समिति बताती है कि, वर्ष 2021 में मंदिर में विधिवत पूजा और उत्सवों की परंपरा फिर से शुरू की गई। मंदिर परिसर में स्थित पुराना कुआं और निर्माण की शैली इस बात की पुष्टि करती है कि यह स्थान ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सोने के लोटे से जलाभिषेक
मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ष श्रावण मास में मंदिर समिति ने एक खास निर्णय लिया। भगवान शिव को जल अर्पित करने के लिए 250 ग्राम के शुद्ध स्वर्ण लोटे की व्यवस्था की गई है। सावन के इस अवसर पर यह लोटा भक्तों की आस्था और समर्पण का प्रतीक बन चुका है।
भक्तों के लिए सेवा और सहयोग की व्यवस्था
मंदिर समिति ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए कई स्तरों पर जिम्मेदारियां तय की हैं। विभिन्न सदस्यों को अलग-अलग कार्य सौंपे गए हैं। पिछले 3 दिनों से मंदिर में भंडारा लगातार जारी है। बड़ी संख्या में कांवरिए मंदिर में रुक भी रहे हैं। अनुमान है कि इस बार शिवरात्रि के दिन श्रद्धालुओं की संख्या 7000 से अधिक हो सकती है।
मंदिर परिसर ओर आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम
वही, मंदिर परिसर और आसपास सुरक्षा के लिहाज से पुलिस बल की तैनाती की गई है, साथ ही भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए विशेष दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। सुरक्षा के दृष्टिकोण से स्वर्ण लोटे के प्रयोग को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मंदिर परिसर में CCTV कैमरे भी लगाए गए हैं और समिति के स्वयंसेवक हर समय निगरानी में जुटे हैं।
एक धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र का विकास
समिति की योजना है कि आने वाले वर्षों में मंदिर परिसर का और विस्तार किया जाना है। इसमें श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए धार्मिक विश्रामगृह, पुस्तकालय, और ध्यान केंद्र की स्थापना प्रस्तावित है। इसके अलावा, मराठा कालीन वास्तुकला और इतिहास को सहेजने के लिए एक स्थायी प्रदर्शनी कक्ष बनाने की योजना भी विचाराधीन है।





