नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सनातन धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है। 16 दिनों तक चलने वाला यह पावन काल दिवंगत पितरों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद को पाने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। इस साल पितृपक्ष 5 सितंबर से शुरू होकर 20 सितंबर 2025 (शनिवार) को सर्वपितृ अमावस्या पर समाप्त हो रहा है।
अगर आपने अभी तक श्राद्ध, तर्पण या पिंडदान नहीं किया है, तो घबराइए मत! अभी भी समय है। पितृपक्ष के बचे हुए दिनों में इन 7 शुभ कार्यों को करके आप अपने पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं और उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का संचार कर सकते हैं।
1. श्रद्धा से करें श्राद्ध और तर्पण
श्राद्ध सिर्फ एक कर्मकांड नहीं, यह आपकी श्रद्धा का प्रतीक है। यदि पितरों की तिथि ज्ञात है तो उसी दिन, और अगर नहीं पता तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन ज़रूर श्राद्ध करें। मान्यता है कि तर्पण से पितर संतुष्ट होकर कष्टों को हर लेते हैं।
2. पक्षियों और जीवों को अन्न का दान
पितृपक्ष में गाय, कुत्ते, कौवे, मछलियों और चींटियों को भोजन कराना पुण्यकारी होता है।
गाय को हरा चारा,
चींटियों को आटा-चीनी,
मछलियों को आटे की गोली
और कौवों को रोटी देकर पितरों को प्रसन्न किया जा सकता है।
3. दक्षिण दिशा में रोज़ दीपक जलाएं
धार्मिक मान्यता के अनुसार दक्षिण दिशा पितरों की दिशा मानी जाती है। पितृपक्ष में रोज़ाना सूर्यास्त के बाद दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर पितरों को स्मरण करें।
4. पीपल वृक्ष की पूजा न करें नज़रअंदाज़
पीपल के पेड़ में पितरों का वास माना गया है। इस दौरान पीपल को जल चढ़ाएं, उसकी जड़ में दीपक जलाएं और “ॐ नमः भगवते वासुदेवाय” का जप करें।
5. ब्राह्मण भोज कराएं और दान दें
यदि संभव हो तो एक वेदपाठी ब्राह्मण को आमंत्रित कर घर पर सम्मानपूर्वक भोजन कराएं और यथाशक्ति वस्त्र, अन्न, दक्षिणा आदि दान करें। यह परंपरा सदियों से पितरों की आत्मा की तृप्ति के लिए की जाती रही है।
6. सात्विक जीवनशैली अपनाएं
पितृपक्ष में मांस-मदिरा से दूर रहें और सात्विक आहार लें। संयम, ब्रह्मचर्य और सेवा भाव से जीवन जीकर पितरों को आत्मिक श्रद्धांजलि दें।
7. विशेष वस्तुएं दान करें
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस अवधि में गाय, भूमि, तिल, स्वर्ण, अन्न, नमक, चांदी, घी आदि का दान विशेष पुण्यदायी होता है। यदि पिंडदान के साथ यह किया जाए तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है।
जानिए क्या कहती है मान्यता
धार्मिक मान्यता है कि पितृपक्ष में पितर धरती पर आते हैं और अपने वंशजों से तृप्ति की कामना करते हैं। अगर उन्हें श्रद्धा से याद कर तर्पण और दान दिया जाए, तो वे प्रसन्न होकर पितृदोष से मुक्ति दिलाते हैं और जीवन में सुख-शांति, धन-धान्य और संतान सुख का आशीर्वाद देते हैं।
याद रखिए : पितृपक्ष में कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि वर्जित माने जाते हैं।
इस समय पितरों की पूजा कर उनके ऋण से मुक्त होने का अवसर होता है।
20 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन विशेष रूप से दान-पुण्य करना अत्यंत लाभकारी है।
पितृपक्ष एक अवसर है संस्कारों को जीने का, अपने पूर्वजों को स्मरण करने का और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का। यदि आपने अभी तक कुछ नहीं किया है, तो इन आसान लेकिन प्रभावशाली उपायों को कर अपने पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करें। हो सकता है आपका एक छोटा सा प्रयास, आपके पूरे जीवन की दिशा बदल दे!




