नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भगवान विष्णु को समर्पित योगिनी एकादशी का व्रत बहुत फलदायी माना जाता है। यह व्रत आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन अन्न वस्त्र जल और धन का दान करना शुभ माना जाता है। इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है गाय को चारा खिलाने और मंदिर में दीप दान करने से भी विशेष फल मिलता है। इस दिन किन चीजों का दान माना जाता है बेहद शुभ ।
योगिनी एकादशी पर मनचाहे वर की प्राप्ति व मनचाहे मनोकामना की प्राप्ति के लिए हमें क्या दान करना चाहिए आइए जाने डिटेल में।
योगिनी एकादशी पर करें ये दान
योगिनी एकादशी पर अन्न का दान करना सबसे शुभ माना जाता है। इस दिन गरीबों को चावल, गेहूं, दाल का दान करने से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती और मां अन्नपूर्णा की कृपा मिलती है।
योगिनी एकादशी पर पीले रंग के वस्त्रों का दान करना बहुत फलदायी होता है। ये रंग भगवान विष्णु का प्रिय होने के नाते इसके दान से घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
योगिनी एकादशी पर गर्मी के मौसम में प्यासे लोगों को पानी पिलाना महादान माना जाता है। इसके लिए आप पानी के लिए बर्तनों का दान भी कर सकते हैं। इससे मानसिक शांति और धन संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।
योगिनी एकादशी पर अपनी क्षमता के अनुसार धन का दान भी करना चाहिए, इससे दान का फल कई गुना बढ़ जाता है।
योगिनी एकादशी पर गाय को हरा चारा खिलाएं या गौशाला में दान करें इससे मां लक्ष्मी खुश होती हैं। इसके साथ ही सभी कष्टों का अंत होता है।
योगिनी एकादशी पर मंदिर में दीपक जलाने के लिए तेल या घी का दान करें, इससे सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। व घर की दरिद्रता दूर होती है।
योगिनी एकादशी पर जरूर करें इन नियमों का पालन
– योगिनी एकादशी के दिन अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए, एकादशी का व्रत नहीं रखने वालों को चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन बाल, नाखून, और दाढ़ी कटवाने की भूल न करें। योगिनी एकादशी व्रत के पारण करने के बाद अन्न का दान करना शुभ माना गया है।
जरूर करें इन मंत्रो का जाप
– योगिनी एकादशी के दिन इन मंत्रो का जाप करने से हर मनोकामना की पूर्ति होती है,
ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम: ओम नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात्.।ओम ह्रीं श्रीं लक्ष्मीवासुदेवाय नमःशान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशंविश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्।लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥





