नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। नवरात्रि का पर्व हिन्दू धर्म में बहुत ही खास और शुभ माना जाता है।इस दौरान माता रानी के 9 रूपों की पूजा अर्चना की जाती है। इस दौरान माता को प्रसन्न करने के लिए जातक व्रत भी रखते है। इस दौरान माता रानी की अच्छे से पूजा अर्चना की जाती है। वहीं नवरात्रि के चौथे दिन माता कूष्मांडा की विशेष पूजा और आरती का खास ख्याल रखा जाता है। देवी कूष्मांडा रिद्धि-सिद्धि को देने वाली मां है। मां दुर्गा का ये स्वरूप अपने भक्त को आर्थिक ऊंचाईयों पर ले जाने में निरन्तर सहयोग करने वाला है। इस लिए आपको उनका अच्छे से सिंगार करके उनकी अर्चना करनी चाहिए ताकि माता खुश होकर आशीर्वाद प्रदान कर सके।
मां कूष्मांडा की आरती
कूष्मांडा जय जग सुखदानी।
मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली।
शाकंबरी माँ भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे ।
भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदंबे।
सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
माँ के मन में ममता भारी।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा।
दूर करो माँ संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो।
मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
मां कूष्मांडा की पूजा विधि
माता की पूजा के लिए सबसे पहले उठ कर स्न्नान करके पीला वस्त्र धारण करें। इसके बाद माता की पूजा के लिए पूजा सामग्री लें। और फिर अपनी पूजा शुरू करें। पूजा की देवी को पंचामृत से स्नान करवाएं।इसके बाद माता रानी के सामने देशी घी का दीपक जलाएं। फिर माता रानी को पीला फूल और कुमकुम अर्पित करें।फिर फल और मिठाई और मालपुआ का भोग लगाएं। मां को मालपुआ बहुत पसंद है, इसलिए पूजा में मालपुआ का जरूर चढ़ाएं। इस दौरान माता का नाम लेते हुए उनके मंत्रों का भी जाप करें। फिर फल और मिठाई का भोग भी लगाएं। इसके बाद आरती के साथ माता रानी की पूजा पूरी करें।




