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Friday, April 10, 2026
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मकर संक्रांति 2026: इन 5 जगहों पर देखें त्योहार का सबसे रंगीन रूप, गुजरात से प्रयागराज तक

मकर संक्रांति 2026 देशभर में आनंद, आस्था और रंग-बिरंगी परंपराओं का संगम है, जो जीवन में खुशियों और नई ऊर्जा का संदेश देती है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सूर्य के उत्तरायण होते ही भारत में उत्सवों का मौसम शुरू हो जाता है और मकर संक्रांति का पर्व हर राज्य में अपनी-अपनी रीतियों और रंगों के साथ मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने और दक्षिणायन से उत्तरायण की यात्रा शुरू होने का प्रतीक है। खेतों में नई फसल की खुशी, घरों में तिल-गुड़ की मिठास और आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें-मकर संक्रांति हर रूप में जीवन में उजाला और उल्लास भरती है।

1. गुजरात: पतंगों का जादू

गुजरात में मकर संक्रांति केवल त्योहार नहीं, बल्कि जन-उत्सव है। अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा में अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव का आयोजन होता है। लोग छतों पर “काई पो चे” के नारों के साथ पतंगबाजी करते हैं और आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। ऊंधियू, जलेबी और चिक्की जैसी मिठाइयां इस त्योहार की पहचान हैं। शाम को टुक्कल (लैंप पतंग) आसमान को जादुई बना देते हैं, जिससे उत्सव का माहौल और भी रोमांचक हो जाता है।

2. प्रयागराज: आस्था की डुबकी

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मकर संक्रांति आध्यात्मिक शुद्धि का पर्व है। संगम में लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के मिलन स्थल पर पवित्र स्नान करते हैं। दान-पुण्य, खिचड़ी और तिल व वस्त्र दान का विशेष महत्व है। यह दिन आध्यात्मिक सफाई और पुण्य कमाने का प्रतीक माना जाता है और इसे देखने और अनुभव करने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

3. तमिलनाडु: पोंगल का चार दिवसीय उत्सव

दक्षिण भारत में मकर संक्रांति को पोंगल के रूप में मनाया जाता है। यह चार दिन तक चलता है-भोगी, थाई पोंगल, मट्टू पोंगल और कानुम पोंगल। इस दौरान नई फसल से बना मीठा पोंगल भोग लगाया जाता है, गाय-बैलों की पूजा की जाती है और घरों के सामने रंगोली सजाई जाती है। यह पर्व किसानों के सम्मान और नई फसल के स्वागत का प्रतीक है।

4. राजस्थान: संस्कृति और पतंगों का संगम

राजस्थान में मकर संक्रांति का जश्न पतंगबाजी और लोक-संस्कृति का संगम है। जयपुर और अन्य शहरों में पतंगबाजी प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं। लोकगीत और पारंपरिक व्यंजन इस पर्व को खास बनाते हैं। महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर सूर्य को अर्घ्य देती हैं और उत्सव का आनंद बढ़ाती हैं।

5. महाराष्ट्र: तिलगुल का संदेश

महाराष्ट्र में मकर संक्रांति सामाजिक सौहार्द का पर्व है। लोग एक-दूसरे को तिलगुल देते हुए कहते हैं, “तिलगुल घ्या, गोड गोड बोला।” इसका अर्थ है कि जैसे तिल और गुड़ मिलकर मिठास देते हैं, वैसे ही जीवन में भी कटुता छोड़कर मधुरता अपनाई जाए। यह पर्व प्रेम, भाईचारे और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का संदेश देता है।

मकर संक्रांति 2026 में देशभर के अलग-अलग हिस्सों में उत्सव की धूम देखने को मिलेगी। गुजरात, प्रयागराज, तमिलनाडु, राजस्थान और महाराष्ट्र इसके प्रमुख केंद्र होंगे। यह पर्व न केवल आनंद और उल्लास का प्रतीक है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, प्रेम और सामाजिक सौहार्द का संदेश भी देता है।

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