नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथ यात्रा आज 27 जून, यानी आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से आरंभ हो रही है। यह भव्य यात्रा ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर से शुरू होगी। इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा रथों में सवार होकर नगर भ्रमण करते हुए गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं। वहां सात दिनों के विश्राम के पश्चात वे पुनः अपने मूल स्थान पर लौटते हैं। इस यात्रा के दौरान भक्तों को रथ की रस्सी खींचने और उसे स्पर्श करने का सौभाग्य प्राप्त होता है, जिसे पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग माना गया है। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के लिए अलग-अलग तीन भव्य रथों का निर्माण किया गया है। चलिए, अब आपको बताते हैं कि ये रथ किस तरह के हैं और इनमें क्या विशेषताएं हैं।
जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए बनाए गए तीन विशाल रथ
– भगवान जगन्नाथ के लिए विशेष रूप से नंदीघोष रथ तैयार किया गया है, जो 18 पहियों वाला और लगभग 45 फीट ऊँचा है।
– उनके भाई, बलभद्र के लिए तालध्वज रथ तैयार किया गया है, जिसमें 16 पहिए लगे हैं और इसकी ऊंचाई लगभग 44 फीट है।
– बहन सुभद्रा के लिए दर्पदलन रथ बनाया गया है, जो 14 पहियों वाला और करीब 43 फीट ऊँचा होता है। तीनों भगवान अलग-अलग रथों में बैठकर इस यात्रा को पूरा करते हैं।
जगन्नाथ रथ यात्रा 2025 का शेड्यूल
27 जून – रथ यात्रा का आरंभ
आज भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा तीन अलग-अलग भव्य रथों में सवार होकर यात्रा शुरू करेंगे। यह यात्रा गुंडिचा मंदिर की ओर होगी। इस दिन छेरा पन्हारा की रस्म भी होती है, जिसमें सोने के झाड़ू से रथ का चबूतरा साफ किया जाता है।
1 जुलाई – हेरा पंचमी
भगवान जगन्नाथ गुंडिचा मंदिर में पांच दिन बिताने के बाद देवी लक्ष्मी उनसे नाराज होकर मिलने आती हैं। इस अवसर को हेरा पंचमी के नाम से जाना जाता है, जो इस वर्ष 1 जुलाई, मंगलवार को मनाई जाएगी।
4 जुलाई – संध्या दर्शन
गुंडिचा मंदिर में इस दिन विशेष संध्या दर्शन का आयोजन होता है। भक्तजन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन कर पावन अनुभव प्राप्त करते हैं।
5 जुलाई – बहुदा यात्रा
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा वापसी यात्रा शुरू करेंगे और जगन्नाथ मंदिर लौटेंगे। इस दौरान वे रास्ते में मौसी मां के मंदिर पर ठहराव करते हैं, जहां उन्हें ओडिशा की प्रसिद्ध मिठाई पोडा पिठा का भोग लगाया जाता है।
6 जुलाई – सुना बेशा
सुना बेशा की इस रस्म में भगवानों को स्वर्ण आभूषणों से सजाया जाता है। इस श्रृंगार को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं।
7 जुलाई – अधरा पना
इस दिन भगवान को अधरा पना अर्पित किया जाता है, जो एक विशेष मीठा पेय होता है। इसे मिट्टी के घड़ों में पानी, दूध, पनीर, चीनी और पारंपरिक मसालों से तैयार किया जाता है।
8 जुलाई – नीलाद्रि विजय
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने मंदिर वापस लौटते हैं और गर्भगृह में पुनः स्थापित होते हैं। इस पुनः स्थापना को नीलाद्रि विजय के रूप में मनाया जाता है।
Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य तथ्यों पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।




