नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। आज पुरे देश में ये खास वर्षमनाया जा रहा हैं, ऐसे में आपको आज के दिन पूजा के दौरान यदि कोई गलती या लापरवाही हो जाए, तो श्रीकृष्ण रुष्ट भी हो सकते हैं, जिससे पूजा का फल विपरीत असर भी ला सकता है। लेकिन पूजा के दौरान यदि कोई गलती या लापरवाही हो जाए, तो श्रीकृष्ण रुष्ट भी हो सकते हैं, जिससे पूजा का फल विपरीत असर भी ला सकता है।
लड्डू गोपाल की पूजा करते समय रखें ये सावधानियां
स्वच्छता का रखें विशेष ध्यान
भगवान श्रीकृष्ण को स्वच्छता अत्यंत प्रिय है। ऐसे में जन्माष्टमी के दिन पूजा से पहले घर और पूजा स्थल की अच्छे से सफाई जरूर करें। स्वयं भी स्नान करके साफ-सुथरे और स्वच्छ वस्त्र पहनें। लड्डू गोपाल को गंदे हाथों से छूने से बचें। उनकी मूर्ति को शुद्ध जल या गंगाजल से स्नान कराकर ही पूजा में स्थापित करें। याद रखें, स्वच्छ माहौल में की गई भक्ति ही उन्हें प्रिय है।
खंडित मूर्ति की न करें पूजा
अगर लड्डू गोपाल की मूर्ति किसी भी रूप में टूट गई हो, चाहे छोटा सा हिस्सा ही क्यों न खंडित हुआ हो, तो उसकी पूजा करना शास्त्रों के अनुसार वर्जित माना गया है। खंडित मूर्ति को अशुभ और दोषपूर्ण माना जाता है। ऐसे में उचित यही है कि पुरानी मूर्ति का विधिपूर्वक विसर्जन करें और उसकी जगह एक नई और संपूर्ण मूर्ति स्थापित कर पूजन करें।
तुलसी के पत्तों का विशेष महत्व
भगवान कृष्ण को तुलसी के पत्ते बेहद प्रिय हैं। उनकी पूजा में तुलसी दल अर्पित करना अनिवार्य माना जाता है, क्योंकि बिना तुलसी के पूजा पूरी नहीं होती। साथ ही यह ध्यान रखें कि तुलसी के पत्ते एकादशी, द्वादशी, रविवार और मंगलवार को न तोड़े जाएं, क्योंकि इन दिनों तुलसी तोड़ना अशुभ माना जाता है।
भोग में तामसिक भोजन से परहेज करें
जन्माष्टमी के अवसर पर लड्डू गोपाल को केवल सात्विक भोजन का भोग लगाएं। प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक भोजन बिलकुल न लगाएं। माखन, मिश्री, पंचामृत, मेवे और ताजे फलों को भोग के रूप में अर्पित करना शुभ होता है। भोग लगाते समय लड्डू गोपाल को पूर्ण प्रेम और श्रद्धा के साथ भोग अर्पित करें। भोग लगाने के बाद उसे तुरंत हटा लेना चाहिए, ताकि वह बासी न हो। इसके बाद भोग को प्रसाद के रूप में सभी को वितरित करें।
पूजा के समय क्रोध और बुरी भाषा से बचें
पूजा के दौरान मन को शांत और एकाग्र बनाए रखें। किसी के प्रति क्रोध न करें और अपशब्दों का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। भगवान केवल शांति और भक्ति से भरे हृदय की पूजा स्वीकार करते हैं।
काले और नीले रंग के वस्त्र पहनाने से बचें
लड्डू गोपाल को काले या नीले रंग के कपड़े पहनाना उचित नहीं माना जाता। इन रंगों को अशुभ माना जाता है। इसलिए उन्हें पीले, लाल, गुलाबी या नारंगी जैसे चमकीले और सुंदर रंग के वस्त्र पहनाएं।
पूजा एकांत और शांति वाले स्थान पर करें
लड्डू गोपाल की पूजा किसी शांत और एकांत स्थान पर करें ताकि आपकी एकाग्रता बनी रहे। पूजा के दौरान बातचीत से बचें और पूर्ण मनोयोग से पूजा करें।
पूजा के बाद मूर्ति को अकेला न छोड़ें
पूजा के बाद लड्डू गोपाल की मूर्ति को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। उन्हें अपने बच्चे की तरह प्यार करना चाहिए। लड्डू गोपाल को झूले में झुलाएं और उनके साथ समय बिताएं।
डिस्क्लेमर : इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।
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