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Saturday, April 4, 2026
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अगर आप भी पहली बार कर रही हैं सोमवार का व्रत, तो करें इन नियमों का पालन

वैसे तो सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है। जिसमें अक्सर सभी लोग अपनी सुविधा और श्रद्धा अनुसार व्रत रखते है ऐसे ही सोमवार का व्रत जिसके बारें में आज हम बताने जा रहे है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हिंदू धर्म के अनुसार हफ्ते के सातों दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होते है। ऐसे ही सोमवार का दिन भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन का उपवास रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। साथ ही व्रत के नियमों का पालन करने से पुण्‍य का फल मिलता है। आइए जानते है इस दिन के व्रत का विधिपूर्वक विधान। 

सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करने व उपवास रखने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। और जिनके विवाह में देरी हो रही हैं उन्हें मनचाहे वर की प्राप्ति होती है।इसलिए कहा जाता है कि इस दिन का व्रत विधिपूर्वक और श्रद्धापूर्वक करना चाहिए। इसके साथ ही व्रत के नियमों का पालन भी करना चाहिए। आइए जानते है भोले बाबा को प्रसन्न करने विधि। 

सोमवार व्रत के नियम

सोमवार के दिन सुबह व्रती को जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। 

नहाने के पानी में गंगाजल जरूर मिलाएं।

और साफ कपड़े पहन भगवान भोलेनाथ के फोटो मूर्ति के सामने व्रत का संकल्प लें।

व्रत के दिन या पूजा में काले रंग के कपड़े पहनने से बचें।

एक वेदी बनाकर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें।

फिर पूरे घर को गंगाजल से शुद्ध कर बाबा की पूजा करे। 

सबसे पहले जल चढ़कार, दूध से स्नान करा पंचामृत से भोलेनाथ का अभिषेक करें।

फिर सफेद चंदन, पीला चंदन, लाल चंदन, मौली, गुलाल, अबीर लगाए। 

सफेद फूल बेलपत्र, भांग, धतूरा शिव जी को अर्पित करें।

इसके बाद मीठे का भोग लगाए इसमें आप खीर भी बनाकर चढ़ा सकते है। 

फिर सोमवार का व्रत कथा पाठ करें या सुनें।

उनके ऊँ नम: शिवाय का रुद्राक्ष माला से जाप कर शिव जी का ध्यान करें 

अंत में आरती कर समस्त गलतियों के लिए माफी मांगे ।

इस दिन तामसिक चीजों से दूर रहें।

शिव जी के पूजा में हल्दी, रोली और तुलसी का पत्र भूलकर भी ना चढ़ाए। 

अगले दिन सुबह व्रत में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगे और प्रसाद से अपना व्रत खोलें

सोमवार के व्रत में इन मंत्रों का जाप करें। 

ओम तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात ।।

शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।।

ईशानः सर्वविध्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रम्हाधिपतिमहिर्बम्हणोधपतिर्बम्हा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम।।

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