नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। भाद्रपद में आने वाली शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाई जाती है। इस दिन सभी सुहागन महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करती हैं। ऐसा करने से पति की लंबी आयु बढ़ती हैं। इसके साथ ही कुंवारी लड़कियां भी इस व्रत को रख कर अच्छे वर की कामना करती हैं। लेकिन आज के दिन इस व्रत को करने से पहले सुहागिन महिलाओं को पूरा 16 श्रृंगार करना चाहिए। वहीं इस बार हरतालिका तीज 6 सितंबर 2024 को मनाई जाएगी।
16 श्रृंगार का महत्व
माथे का टीका और कंगन
माथे पर टीका सुंदरता को बढ़ाने के साथ -साथ आप को सबसे अलग दिखता हैं।
हाथों में कंगन
कंगन पहनने से शरीर रक्त की चाल सही रहती है। अगर रक्त संचार सही होता है तो शरीर में थकान नहीं होती है l साथ ही हारमोंस को भी बैलेंस रखता है। और ये आप के हाथों को और खूबसूरत बनता है।
बिंदी और गजरा
माथे पर लगा सिंदूर का टीका यानि बिंदी आपको काफी सूंदर और आकर्षित बनती हैं।
महिलाओं को गजरा भी लगाना चाहिए माता पार्वती गजरा का श्रृंगार किया था।
मेंहदी और सिंदूर
किसी भी त्योहार पर सुहागन महिलाओं को श्रृंगार में मेहंदी के बिना अधूरा माना जाता है। मेहंदी ठंडक प्रदान करता है। इससे त्वचा संबंधी रोग समाप्त होते हैं।
मांग का सिंदूर सुहागन की निशानी माना जाता है। सिंदूर चेहरे की खूबसूरती निखरता है। इसका वैज्ञानिक आधार है कि मांग का सिंदूर शरीर में विद्युत ऊर्जा को नियंत्रित करता है।
मंगलसूत्र और कान के कुंडल
मंगलसूत्र ऐसा गहना हैं कि शादी के बाद आपको जरूर पहनना चाहिए।इतना ही नहीं बल्कि गले में मंगलसूत्र पहनने से हृदय संबंधी बीमारी खत्म होती है।
कान में पहने जाने वाले आभूषणों से मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है इतना ही नहीं कान छेदन से आंखों की रोशनी में तीव्र होती है।इसके साथ ही ये कान को और सुन्दर बनाते हैं।
लाल जोड़ा और बाजूबंद
लाल जोड़ा भी श्रृंगार का अहम हिस्सा है। शादी के दिन हर दुल्हन आपको इसी रंग में रंगी हुई नजर आ जाएगी। इसे पहन के पूजा करने से अंखड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
बाजूबंद पहनने से भुजाओं में रक्त प्रवाह ठीक बना रहता है। साथ ही धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका संबंध धन रक्षा से माना गया है। और ये आपके बाजू की सोभा बढ़ाते है।
कमर बंद और पायल
कमर बंद ऐसा श्रृंगार होता है इसे महिलाएं अपनी कमर में पहनती हैं। जिसमें नववधू चाबियों का गुच्छा अपनी कमर में लटकाकर रखती हैं। कमरबंद पहने से प्रतीक होता है कि सुहागन अब अपने घर की स्वामिनी है।
पैरो चांदी की पायल शुभता और संपन्नता का प्रतीक होती है। बहू को घर की लक्ष्मी माना जाता है, इसलिए घर की संपन्नता बनाए रखने के लिए दुल्हन के श्रंगार में पायल आवश्यक मानी गई हैं।
बिछिया और नथ
मांग के सिंदूर की तरह ही बिछिया भी सुहाग की प्रमुख निशानियां मानी जाती है।
सुहागन महिलाओं के लिए नथ एक आवश्यक आभूषण माना गया है। नथ पहनने से घर में खुशहाली आती है।
अंगूठी और काजल
अंगूठी पहनना शरीर में रक्त के संचार को नियंत्रित रखता है। यह हाथों की सुंदरता को बढ़ाता है।
आखों में काजल लगाने से सुहागि स्त्री की सुंदरता में चार चांद लग जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार काजल बुरी नजर से भी रक्षा करता है।




