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Tuesday, March 3, 2026
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Govardhan Puja 2025 Date: कब मनाई जाएगी गोवर्धन पूजा, जानें प्रात:काल का शुभ मुहूर्त और पूजा के महत्व

जानकारी के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर गोवर्धन पूजा 2025 का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करने का विधान है।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । दिवाली के अगले दिन यानी गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja 2025) हर्ष और उल्लास के साथ मनाई जाती है। मथुरा और देश के कई हिस्सों में इस दिन विशेष धूमधाम रहती है। भक्त इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर उनकी कृपा और आशीर्वाद पाने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।

गोवर्धन पूजा 2025 डेट और शुभ मूहर्त 

वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा 21 अक्टूबर को शाम 5:54 बजे शुरू होकर 22 अक्टूबर को रात 8:16 बजे समाप्त होगी। इस प्रकार, गोवर्धन पूजा का पर्व वर्ष 2025 में 22 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

सूर्योदय – सुबह 06 बजकर 26 मिनट से

सूर्यास्त – शाम 06 बजकर 44 मिनट पर

चंद्रोदय – प्रातः 07 बजकर 01 मिनट से

चंद्रास्त – शाम 06 बजे

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 45 मिनट से 05 बजकर 35 मिनट तक

विजय मुहूर्त- दोपहर 01 बजकर 58 मिनट से लेकर 02 बजकर 44 मिनट तक

गोधूलि मुहूर्त- शाम 05 बजकर 44 मिनट से 06 बजकर 10 मिनट तक

अमृत काल- दोपहर 04 बजे से 05 बजकर 48 मिनट तक

गोवर्धन पूजा के दिन करें ये उपाय

गोवर्धन पूजा के दिन मां तुलसी की विधिपूर्वक पूजा करें और देसी घी का दीपक जलाएं। तुलसी मंत्र का जप करने से अन्न-धन का भंडार बढ़ता है और जीवन में समृद्धि बनी रहती है। इसके साथ ही परिवार के सभी सदस्यों पर मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है।

ऐसे दूर करें आर्थिक तंगी

यदि आप आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं, तो गोवर्धन पूजा के दिन सुबह स्नान के बाद गाय माता की विधिपूर्वक पूजा करें। उन्हें तिलक लगाकर फूलमाला पहनाएं और अंत में चारा खिलाएं। धार्मिक मान्यता है कि इससे आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और धन लाभ के योग बनते हैं।

।।गोवर्धन पूजा मंत्र ।।

गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक।

विष्णुबाहु कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रभो भव।।

।।श्री कृष्ण के शक्तिशाली मंत्र।।

”श्री कृष्णाय वयं नुम:

सच्चिदानंदरूपाय विश्वोत्पत्यादिहेतवे।

तापत्रयविनाशाय श्रीकृष्णाय वयं नुम:।।

ॐ देविकानन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात”

Disclaimer: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। हम इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करते है। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। हम अंधविश्वास के खिलाफ है।

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