नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पुराणों में कहा गया है कि रोशनी भगवान का प्रतीक है। दीपक जलाने से अंधकार दूर होता है और जीवन में नई शुरुआत होती है। देवउठनी एकादशी पर दीपक जलाने का विशेष महत्व माना गया है। इस साल यह पर्व आज 01 नवंबर 2025, शनिवार को मनाया जा रहा है। इस दिन सही स्थानों पर दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि और धन की वृद्धि होती है।
1. तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं
देवउठनी की शाम को तुलसी माता के पास 5 दीपक घी से जलाना शुभ है। तुलसी माता को लक्ष्मी और हरिप्रिया का स्वरूप माना गया है। ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, वैवाहिक जीवन में प्रेम और स्थिरता आती है और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी प्रसन्न रहते हैं।
2. मुख्य द्वार पर दीपक
मुख्य दरवाजे के दोनों ओर घी के दीपक जलाने से घर की रक्षा होती है। यह उपाय घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखता है और बुरी नजर से सुरक्षा करता है। व्यापार और नौकरी में तरक्की के लिए यह उपाय बेहद लाभकारी है।
3. पीपल के पेड़ के नीचे दीपक
शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाकर उसकी सात परिक्रमा करें। यह खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो आर्थिक परेशानियों या कर्ज से जूझ रहे हैं। ऐसा करने से धन लाभ के नए रास्ते खुलते हैं और कर्ज मुक्ति के योग बनते हैं।
4. रसोई घर में दीपक
रसोई घर को अन्नपूर्णा देवी का स्थान माना जाता है। इस दिन रसोई में दीपक जलाने से घर में अन्न की कमी नहीं होती और परिवार में समृद्धि आती है। आप दीपक जलाने के बाद मीठा प्रसाद अन्नपूर्णा देवी को अर्पित कर सकते हैं।
5. तुलसी विवाह का आयोजन
देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी माता का शालिग्राम भगवान विष्णु से विवाह किया जाता है। घर में तुलसी विवाह करने से वैवाहिक जीवन में सौहार्द बढ़ता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। विवाह योग्य व्यक्तियों के लिए अच्छे रिश्तों के अवसर भी आते हैं।
अन्य उपाय और सावधानियां
पूरे घर की सफाई और सजावट करें। दरवाजे पर रंगोली और फूल या आम के पत्तों का तोरण लगाएं।
सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करें।
तुलसी माता को दूध और जल चढ़ाएं।
यदि संभव हो तो गरीबों को भोजन या मिठाई दान करें।
शाम को पूरे घर में घी के दीपक जलाकर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
इस दिव्य दिन पर इन उपायों को अपनाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, सुख-समृद्धि आती है और जीवन में नई खुशियों का प्रवेश होता है।




