नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी को लेकर लोगों के मन में काफी कुछ चल रहा है कि अष्टमी 5 को है या फिर 6 को। अगर आपके मन में भी ये कन्फूशन आ रहा है तो चलिए इससे जुड़ी सारी जानकारी आपको देते हैं। और साथ ही ये भी बताते हैं की अष्टमी के दिन किस मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि 2025 की महाअष्टमी
हिन्दू पंचांग के अनुसार इस बार चैत्र नवरात्रि में द्वितीय और तृतीय तिथि एक ही दिन पड़ने के करण नवरात्रि नौ नहीं बल्कि आठ दिन की हो रही हैं। वहीं अब लोगों के मन में अष्टमी को लेकर कई सवाल हैं। आपको बता दें कि, 4 अप्रैल को सप्तमी तिथि रहेगी और 5 अप्रैल को अष्टमी। इसके बाद 6 अप्रैल को नवमी तिथि होगी, जिस दिन राम नवमी मनाई जाएगी। वहीं अगर आप कन्या पूजन और हवन अष्टमी के दिन कारन चाहते हैं तो आप 5 अप्रैल को विधि विधान से ये करें।
अष्टमी का शुभ मुहूर्त
शास्त्रों के अनुसार अष्टमी तिथि का प्रारंभ 4 अप्रैल की रात 8:12 मिनट से शुरू होकर 5 अप्रैल की शाम 7:26 तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार अष्टमी तिथि 5 अप्रैल को ही मनाई जाएगी। यानी जिन लोगों को अष्टमी का व्रत रखना है वह 5 अप्रैल को ही व्रत रखेंगे। दुर्गा अष्टमी पर अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक है। दुर्गा अष्टमी का हवन इस मुहूर्त में कर सकते हैं। वहीं महा नवमी को पूरे दिन रवि योग, रवि पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। पूजा के बाद कभी भी हवन कर सकते हैं।
हवन करने का महत्व
हवन में कुछ विशेष सामग्री की आहुति दी जाती है, जो देवी और देवताओं को प्राप्त होते हैं। इससे नवग्रह भी शांत होते हैं, उनसे जुड़े दोष और नकारात्मक प्रभाव भी दूर होते हैं। हवन में देव वृक्ष जैसे आम, आंवला की लकड़ियों के साथ औषधियां भी डाली जाती हैं, जिनकी आहुति देने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और आसपास की हवा शुद्ध होती है।




