नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या का बहुत ज्यादा महत्व होता है। इस दिन लोग गंगा नदी में स्नान करके पुण्य हासिल करते हैं। वहीं प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में मौनी अमावस्या के दिन श्रद्धालु की एक अलग भीड़ देखने को मिलेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि 10 करोड़ से ज्यादा लोग 29 जनवरी यानी मौनी अमावस्या के दिन गंगा में डुबकी लगाएंगे।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मौनी अमावस्या की दिन प्रयागराज महाकुंभ में देश विदेश से लोग आने वाले हैं। इसके लिए उनकी सुरक्षा के कड़े इंतजाम भी किए गए हैं। महाकुंभ में व्यवस्था बनाए रखने के लिए मेला क्षेत्र को नो-व्हीकल जोन घोषित कर दिया गया है। साथ ही श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए सभी सेक्टरों और जोनों में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
भक्तों की सुविधा और उनकी सुरक्षा के लिए अधिकारियों ने कहा कि सार्वजनिक सुविधा को प्राथमिकता देने के लिए ‘अमृत स्नान’ के दौरान कोई विशेष प्रोटोकॉल लागू नहीं होगा। वहीं प्रशासन ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए The Integrated Control and Command Centre को भी सक्रिय कर दिया है। इसके साथ ही आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई असुविधा न हो इसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है और विशेष तैयारी की जा रही है।
मौनी अमावस्या का महत्व
हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या का बहुत ज्यादा महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि मौनी अमावस्या के दिन प्रातः काल श्रद्धा भाव से जो व्यक्ति गंगा नदी में स्नान करता है। उसके समस्त पापों का नाश हो जाता है और जीवन में खुशियां और बरकत आती है। उसके घर परिवार में भी देवी देवताओं की कृपा बनी रहती है। इस दिन मौन रहने का भी बड़ा महत्व है। क्योंकि अमावस्या के दिन चंद्रमा का दर्शन नहीं होता, जिससे मन की स्थिति कमजोर हो जाती है। इस दिन मौन रहकर व्रत करने से मन को नियंत्रित किया जा सकता है।





