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Wednesday, March 18, 2026
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Tulsi Vivah Mantra: आज तुलसी विवाह के दिन इस प्रकार करें मंत्रों का जाप, मिलेगी सुख समृद्धि

आज देश भर में तुलसी विवाह का पर मनाया जाएगा। ऐसे में आज के दिन आपको भगवान विष्णु और तुलसी माता की पूजा अर्चना कर कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। हर साल कार्तिक शुक्ल द्वादशी को इस पर्व का आयोजन होता है। देवउठनी एकादशी के अगले दिन तुलसी विवाह किया जाता है। तुलसी-शालिग्राम का विवाह हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस विवाह को करने से घर-परिवार में सुख-शांति, सौभाग्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है, साथ ही पापों का नाश होता है। इसलिए आज के दिन आपको कुछ चमत्कारी मंत्रों का भी जाप करना चाहिए।

पूजा विधि 

सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। घर के आंगन या छत पर तुलसी के पौधे को सजाएं। मंडप बनाएं, केले या गन्ने के डंठल से। तुलसी के पौधे को नई चुनरी, हल्दी और फूलों से सजाएं। इसके बाद भगवान शालिग्राम को पीले वस्त्र में लपेटकर तुलसी के सामने रखें। दोनों के बीच एक छोटा मंडप बनाएं, जैसे विवाह का मंडप बनाते हैं। अब कलश में जल भरकर उस पर आम के पत्ते और नारियल रखें। इसके बाद तुलसी माता को सुहागिन स्त्री की तरह सजाएं- चुनरी, बिंदी, हल्दी, सिंदूर और फूल पहनाएं। शालिग्राम भगवान को पीले वस्त्र और तुलसी माला पहनाएं। अब दोनों पर गंगा जल छिड़कें और पुष्प अर्पित करें। फिर “कन्यादान” की प्रतीक रस्म करें।तुलसी और शालिग्राम को फूलों की माला पहनाएं। दोनों के प्रतीक के चारों ओर चार फेरे लगाएं।

इन मंत्रों का करें जाप

देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः,

नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।

तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।

धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।

लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।

तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।

तुलसी माता का ध्यान मंत्र-

तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।

धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।

लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।

तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।

तुलसी विवाह का मतलब 

तुलसी विवाह को भगवान विष्णु और माता तुलसी के दैविक मिलन का प्रतीक है। इस लिए आज का पर्व बहुत खास है। पौराणिक कथा के अनुसार, माता तुलसी पहले वृंदा नाम की तपस्विनी थीं। भगवान विष्णु ने उनके सत्य व्रत की रक्षा करने के लिए स्वयं शालिग्राम रूप धारण किया। तभी से तुलसी और शालिग्राम का विवाह किया जाने लगा। इस दिन को धार्मिक और पारिवारिक समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

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डिसक्लेमर

 

इस लेख में प्रस्तुत किया गया अंश किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की पूरी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारियां विभिन्न स्रोतों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/प्रामाणिकताओं/धार्मिक प्रतिष्ठानों/धर्मग्रंथों से संग्रहित की गई हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य सिर्फ सूचना प्रस्तुत करना है,और उपयोगकर्ता को इसे सूचना के रूप में ही समझना चाहिए। इसके अतिरिक्त, इसका कोई भी उपयोग करने की जिम्मेदारी सिर्फ उपयोगक की 

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