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Navratri Special :आज नवरात्रि में कीजिये इन मंत्रो का जाप , माँ कुष्मांडा प्रसन्न होगी !!

Maa Kushmanda : चौथे दिन को मां कुष्मांडा के रूप में पूजने से भक्तों को सृष्टि के निर्माण में सहारा मिलता है और सभी बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है।

नई दिल्ली , 18 अक्टूबर 2023 : नवरात्रि हिन्दू धर्म में एक बहुत ही पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है जो माँ दुर्गा की पूजा के रूप में मनाया जाता है। इस 9 दिनों के उत्सव के दौरान, हर दिन एक रूप में माँ दुर्गा की पूजा की जाती है जिससे भक्त उनकी कृपा पा सकते हैं। नवरात्रि के चौथे दिन का महत्वपूर्ण रूप – मां कुष्मांडा का पूजन है।

मां कुष्मांडा का रूप: मां कुष्मांडा का नाम इसी तत्त्व से मिलता है जिसका अर्थ होता है -“कुश्माण्डलस्यास्य अस्ति इति कुश्माण्डा” यानी जो जगत को उत्पन्न करने वाली हैं। मां कुष्मांडा को एक पेड़ के नीचे बैठी हुई चंद्रमा की अंधार रूप में पूजा जाता है जिससे उनकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।

मां कुष्मांडा की पूजा का महत्व: चौथे दिन को मां कुष्मांडा के रूप में पूजने से भक्तों को सृष्टि के निर्माण में सहारा मिलता है और सभी बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है। मां कुष्मांडा की पूजा से भक्त नए आरंभों के लिए प्रेरित होते हैं और उन्हें जीवन में सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

मां कुष्मांडा के मंत्र: मां कुष्मांडा की पूजा के दौरान उनके विशेष मंत्रों का जप करना बहुत ही महत्वपूर्ण है। यहां कुछ महत्वपूर्ण मंत्र हैं जो भक्तों को पूजा के समय जपने चाहिए:

  1. या देवी सर्वभूतेषु कुष्माण्डा रूपेण संस्थिता।

  2. वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

मां कुष्मांडा की पूजा की विधि: मां कुष्मांडा की पूजा को सही ढंग से करने के लिए निम्नलिखित कदमों का पालन करें:

  1. शुभ मुहूर्त का चयन: मां कुष्मांडा की पूजा का सही समय निर्धारित करें और शुभ मुहूर्त का चयन करें।

  2. पूजा स्थल की तैयारी: एक शुद्ध और स्वच्छ स्थान चुनें जहां पूजा की जा सकती है।

  3. कलश स्थापना: पूजा का आरंभ कलश स्थापना के साथ करें।

  4. मां कुष्मांडा का पूजन: मां कुष्मांडा की मूर्ति, चंदन, कुमकुम, अखंड दिया, पुष्प, फल, नैवेद्य, सिंदूर, बेल पत्र इत्यादि के साथ पूजन करें।

  5. मंत्र जप: मां कुष्मांडा के मंत्रों का जाप करें और उन्हें प्रसन्न करने का संकल्प करें।

  6. आरती और प्रसाद : अंत में, आरती उतारें और मां कुष्मांडा को प्रसाद चढ़ाएं।

मां कुष्मांडा की पूजा करने से भक्त नए ऊर्जा और सकारात्मकता का आभास करते हैं। इस चौथे दिन की पूजा से भक्त आपके जीवन में नई उच्चाईयों की प्राप्ति के लिए मां कुष्मांडा की कृपा की प्रार्थना करते हैं।

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डिसक्लेमर

इस लेख में प्रस्तुत किया गया अंश किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की पूरी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारियां विभिन्न स्रोतों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/प्रामाणिकताओं/धार्मिक प्रतिष्ठानों/धर्मग्रंथों से संग्रहित की गई हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य सिर्फ सूचना प्रस्तुत करना है, और उपयोगकर्ता को इसे सूचना के रूप में ही समझना चाहिए। इसके अतिरिक्त, इसका कोई भी उपयोग करने की जिम्मेदारी सिर्फ उपयोगकर्ता की होगी।

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