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Mangalwar Mantra: हनुमान जी के इस पाठ को करने से दूर होंगे सारे कष्ट

हनुमान जी के कई प्रभावशाली मंत्र हैं। लेकिन हनुमान अष्टक एक ऐसा पाठ है जिसे करने से सारी परेशानियों का अंत हो जाता है।

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क।14 May 2024। हनुमान अष्टक का पाठ करने से जीवन में चल रही कई परेशानियां का अंत होता है। संकट मोचन नाम लेने से ही कुछ हद तक आपकी बढ़ाएं दूर हो जाती हैं। वहीं, अगर आप इसका पाठ करते हैं तो यह आपके साथ-साथ आपके परिवार के लिए भी काफी लाभदायक होता है।

हनुमान अष्टक का महत्व

किसी व्यक्ति और उसके परिवार के कल्याण के लिए किया जाता है। अगर आपके को चारों तरफ से परेशानियां ने घेरा हुआ है तब आप इसका जाप जरूर करें। इससे सभी बाधाएं आसानी से दूर हो जाती हैं और व्यक्ति को अपने पसंदीदा क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने में कोई बाधा नहीं आती है। संकटमोचन हनुमान अष्टक का जाप व्यक्ति की शिक्षा में भी सफलता की गारंटी देता है और लोगों को उनकी इच्छा के अनुसार उच्च शिक्षा प्राप्त करने में मदद करता है।

हनुमान अष्टक

Sankat Mochan hanuman Ashtak mantra.jpeg

बाल समय रवि भक्षी लियो तब, तीनहुं लोक भयो अँधियारो Iताहि सो त्रास भयो जग को, यह संकट काहू सो जात न टारो IIदेवन आनि करी बिनती तब, छाड़ दियो रवि कष्ट निवारो Iको नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II

बालि की त्रास कपीस बसे गिरि, जात महा प्रभु पंथ निहारो Iचौंकि महा मुनि श्राप दियो तब, चाहिये कौन बिचार बिचारो IIकै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के शोक निवारो Iको नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II

अंगद के संग लेन गये सिया, खोज कपीस यह बैन उचारो Iजीवत ना बचिहौ हम सो जो, बिना सुधि लाये यहाँ पगु धारौ IIहेरि थके तट सिन्धु सबै तब, लाये सिया सुधि प्राण उबारो Iको नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II

रावण त्रास दई सिया को तब, राक्षसि सों कहि शोक निवारो Iताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाय महा रजनी चर मारो IIचाहत सिया अशोक सों आगि सु, दें प्रभु मुद्रिका शोक निवारो Iको नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II

बाण लाग्यो उर लक्ष्मण के तब, प्राण तज्यो सुत रावण मारो Iले गृह वैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सो वीर उपारो IIआनि सजीवन हाथ दई तब, लक्ष्मण के तुम प्राण उबारो Iको नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II

रावण युद्ध अजान कियो तब, नाग कि फाँस सबै सिर दारो Iश्री रघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो IIआनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो Iको नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II

बंधु समेत जबै अहिरावण, लै रघुनाथ पातळ सिधारो Iदेविहिं पूजि भलि विधि सो बलि, देउ सबै मिलि मंत्र विचारो IIजाय सहाय भयो तब ही, अहिरावण सैन्य समेत संघारो Iको नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II

काज किये बड़ देवन के तुम, वीर महाप्रभु देखि बिचारो Iकौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुम सों नहिं जात है टारो IIबेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होय हमारो Iको नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II

दोहा: लाल देह लाली लसे ,अरु धरि लाल लंगूर Iबज्र देह दानव दलन,जय जय जय कपि सूर II

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डिसक्लेमर

इस लेख में प्रस्तुत किया गया अंश किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की पूरी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारियां विभिन्न स्रोतों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/प्रामाणिकताओं/धार्मिक प्रतिष्ठानों/धर्मग्रंथों से संग्रहित की गई हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य सिर्फ सूचना प्रस्तुत करना है, और उपयोगकर्ता को इसे सूचना के रूप में ही समझना चाहिए। इसके अतिरिक्त, इसका कोई भी उपयोग करने की जिम्मेदारी सिर्फ उपयोगकर्ता की होगी।

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