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Somwar Mantra : जानिए सोमवार के दिन भगवान भोलेनाथ को अलग-अलग वस्तुओं से अभिषेक करने का महत्त्व

सोमवार का दिन भगवान भोलेनाथ का होता है इस दिन भगवान की पूजा करके सभी प्रकार के कष्ट से मुक्ति मिलती है। लेकिन क्या आप जानते हैं की अलग-अलग वस्तुओं से भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक करने का क्या महत्त्व

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क 25 December 2023 : हिंदू धर्म के अनुसार सोमवार का दिन भगवान भोलेनाथ को समर्पित है इस दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना की जाती है। भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना करने की कई विधि विधान है ऐसा माना जाता है कि भगवान भोलेनाथ की सही विधि से पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है। वहीं कुछ लोग सोमवार के दिन भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक भी करते हैं। रुद्राभिषेक कई प्रकार के होते हैं और हर एक प्रकार के अलग-अलग फल मिलते हैं।

कितने प्रकार के होते हैं रुद्राभिषेक

भगवान भोलेनाथ को सुख खुश करने के लिए कई सारी चीज होती है उसमें से एक है रुद्राभिषेक वही रुद्राभिषेक कई प्रकार के होते हैं और उनके लिए कई तरह की वस्तुओं का प्रयोग भी किया जाता है। क्योंकि ज्योतिष मनाते हैं कि जिस वस्तु से रुद्राभिषेक करते हैं उससे जुड़ी मनोकामना ही पूरी होती है तो आइए जानते हैं कि कौन सी वस्तु से रुद्राभिषेक करने से पूरी होगी आपकी मनोकामना।

  • घी से अभिषेक करने से आपका वंश आगे बढ़ता है यानी अगर आपको संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है तो आप ही का अभिषेक कर सकते हैं।

  • शक्कर मिले दूध से अभिषेक करने से इंसान विद्वान हो जाता है। यदि आपके बेटे का मन पढ़ाई पर नहीं लगता हैं तो आप अपने बेटे से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करवा सकते है।

  • शहद से अभिषेक करने से पुरानी बीमारियां नष्ट हो जाती हैं। अगर आपको या आपके घर में किसी व्यक्ति को बरसों से कोई बीमारी है तो आप शहर से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कर सकते हैं इससे आपकी बीमारियां कोसों दूर हो जाती है।

  • गाय के दूध और गंगाजल से रुद्राभिषेक करवाने से आपके घर में सुख शांति अथवा बरकत होती है। अधिकतर देखा जाता है कि लोग गाय के दूध और गंगाजल से ही भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक करवाते हैं।

  • भस्म से अभिषेक करने से इंसान को मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  • अगर आपके ऊपर कोई ग्रह बाधा है तो उसे हटाने के लिए यानी ग्रह बाधा नष्ट करने के लिए सरसों के तेल से भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक किया जाता है। और इस दौरान भगवान शिव के ‘प्रलयंकर’ स्वरुप का मानसिक ध्यान किया जाता है।

इन मंत्रो का जरुर करे जाप

  • सर्वदेवात्मको रुद्र: सर्वे देवा: शिवात्मका:।

    रुद्रात्प्रवर्तते बीजं बीजयोनिर्जनार्दन:।।

    यो रुद्र: स स्वयं ब्रह्मा यो ब्रह्मा स हुताशन:।

    ब्रह्मविष्णुमयो रुद्र अग्नीषोमात्मकं जगत्।।

  • रुद्रा: पञ्चविधाः प्रोक्ता देशिकैरुत्तरोतरं | सांगस्तवाद्यो रूपकाख्य: सशीर्षो

    रूद्र उच्च्यते|| एकादशगुणैस्तद्वद् रुद्रौ संज्ञो द्वितीयकः । एकदशभिरेता

    भिस्तृतीयो लघु रुद्रकः।।

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डिसक्लेमर

इस लेख में प्रस्तुत किया गया अंश किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की पूरी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारियां विभिन्न स्रोतों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/प्रामाणिकताओं/धार्मिक प्रतिष्ठानों/धर्मग्रंथों से संग्रहित की गई हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य सिर्फ सूचना प्रस्तुत करना है, और उपयोगकर्ता को इसे सूचना के रूप में ही समझना चाहिए। इसके अतिरिक्त, इसका कोई भी उपयोग करने की जिम्मेदारी सिर्फ उपयोगकर्ता की होगी।

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