नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। दिवाली के दिन लोक माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करते हैं लेकिन दिवाली के एक दिन पहले ही काली चौदस मनाई जाती है जो कि आज है।पंचांग के अनुसार यह पर्व कार्तिक माह में आता है। काली पूजा अमावस्या की रात को होती है, जहां मां काली की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन शुभ मुहूर्त में विशेष मंत्रों के जाप के साथ पूजा होती है।
पूजा विधि
काली पूजा के दिन आपको सुबह नहा धोकर मंदिर की साफ सफाई करनी चाहिए माता काली की प्रतिमा अपने घर में स्थापित करनी चाहिए।माँ को लाल या नीले फूल, सिंदूर, हल्दी, अक्षत और फल अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं, धूपबत्ती और नैवेद्य चढ़ाएं और पूजा के बाद आरती और मंत्रों का जाप करें।
इन मंत्रों का करें जाप
ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं कालिके क्लीं श्रीं ह्रीं ऐं॥
ॐ हरिं श्रीं कलिं अद्य कालिका परम् एष्वरी स्वा:
काली मां का बीज मंत्र
ॐ क्रीं काली
भद्रकाली मंत्र
ह्रौं काली महाकाली किलिकिले फट् स्वाहा॥
सप्ताक्षरी काली मंत्र
ॐ हूँ ह्रीं हूँ फट् स्वाहा
काली गायत्री मंत्र
ॐ महा काल्यै च विद्यामहे स्मसन वासिन्यै च धीमहि तन्नो काली प्रचोदयात्
महाकाली बीज मंत्र
ॐ क्रीं कालिकायै नमः
मां काली का मंत्र
ॐ श्री कालिकायै नमः
दक्षिणकाली मंत्र
ह्रीं ह्रीं ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणकालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रुं ह्रुं ह्रीं ह्रीं॥
क्रीं ह्रुं ह्रीं दक्षिणेकालिके क्रीं ह्रुं ह्रीं स्वाहा॥
ॐ ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं दक्षिणकालिके ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं स्वाहा॥
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रुं ह्रुं ह्रीं ह्रीं दक्षिणकालिके स्वाहा॥
तीन अक्षरी काली मंत्र
ॐ क्रीं ह्रुं ह्रीं
पांच अक्षरी काली मंत्र
ॐ क्रीं ह्रुं ह्रीं हूँ फट्
पूजा हेतु काली मंत्र
कृन्ग कृन्ग कृन्ग हिन्ग कृन्ग दक्षिणे कलिके कृन्ग कृन्ग कृन्ग हरिनग हरिनग हुन्ग हुन्ग स्वा:
काली पूजा का महत्व
मां काली की पूजा करने से भय, रुग्णता और दुर्भाग्य दूर हो जाते हैं। यह पूजा आत्मबल बढ़ाने, शत्रु बाधा नाश करने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने का प्रतीक मानी जाती है।दीवाली की रात, जब पूरा देश लक्ष्मी पूजन करता है, बंगाल में मां काली का पूजन किया जाता है। मां काली को प्रसन्न करने के लिए भक्त तांत्रिक विधियों से विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
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