नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। दिवाली के बाद देव दिवाली का पर्व मनाया जाता है। हालांकि इस पर्व के दिन महादेव की पूजा अर्चना की जाती है उनका आशीर्वाद पाया जाता है।कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली का पर्व मनाया जाता है, जिसमें विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा का महत्व होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था। उनकी विजय से प्रसन्न होकर सभी देवी-देवताओं ने संपूर्ण काशी को दीपों से सजाकर भगवान शिव की आराधना की। आज के दिन आप महादेव के कुछ मंत्रों का जाप करके उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं जिससे आपके घर परिवार में सुख समृद्धि बनी रहेगी।
पूजा विधि
देव दिवाली के दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा में स्नान करें। गंगा में स्नान संभव नहीं तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए उनकी प्रतिमा को चौकी पर लाल सफेद वस्त्र बिछाकर स्थापित करें।इसके बाद भगवान शिव का गंगाजल से जलाभिषेक करें। भगवान शिव को पंचामृत से भी स्नान करा सकते हैं। इसके बाद भगवान शिव को सफेद चंदन लगाएं। बेलपत्र, भांग, धतूरा, सफेद पुष्प, मिष्ठान आदि चढ़ाएं। भगवान शिव के मंत्रों का अखंड जाप करें। इसके बाद उनके समक्ष दीपक जलाएं और फल फूल आदि चढ़कर उनसे अपने जीवन की कामना की प्रार्थना करें।
देव दिवाली का महत्व
देव दिवाली को कई स्थानों पर दिवाली के पर्व से भी ज्यादा महत्व दिया जाता है। क्योंकि आज भी इस दिन काशी नगरी में सभी देवतागण पधारते हैं और धरती पर दीपक जलाते हैं। इस पावन अवसर पर गंगा स्नान, दीपदान, दान-पुण्य और भगवान शिव की आराधना करने से अनेक गुना फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया हर सत्कर्म देवताओं तक सीधे पहुंचता है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि लाता है।
इन मंत्रों का करें जाप
ॐ नमो भगवते रुद्राय।।
ॐ नमः शिवाय:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्, उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्:
ॐ नमः शिवाय शुभं शुभं कुरू कुरू
शिवाय नमः
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं नमः
ॐ नमो भगवते रुद्राय:
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