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Akshaya Tritiya Mantra: अक्षय तृतीया पर इन मंत्रों का करें जाप, धन और वैभव की होगी वर्षा

Akshaya Tritiya: अक्षय तृतीया के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करनी चाहिए। कहते हैं इस दिन उनके मंत्रों का जाप करने से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क।10 May 2024। अक्षय तृतीया का त्यौहार बड़े ही उत्सुकता से मनाया जाता है। आज के दिन सोना-चांदी खरीदने का भी महत्व है। आज के दिन इसे खरीदने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इसके साथी आज के दिन देवी देवी देवताओं के कुछ मंत्रों का जाप करके आप उनकी कृपा का सकते हैं और अपने घर परिवार में खुशियां ला सकते हैं।

अक्षय तृतीया का महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आज के दिन कई कहानी जुड़ी हुई है। कहते हैं कि आज के ही दिन भगवान विष्णु ने न नारायण का अवतार लिया था।सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत अक्षय तृतीया से ही हुई थी। और भगवान परशुराम का जन्म भी इसी दिन हुआ था। वहीं, ये भी कहा जाता हैं कि, ब्रह्म देव के पुत्र अक्षय कुमार की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए इस तिथि को अक्षय तृतीया कहते हैं। ऐसे में इस दिन यदि आप सुख समृद्धि, धन, वैभव आदि प्राप्त करना चाहते हैं तो भगवान को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना करना चाहिए।

अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने का महत्व

अक्षय तृतीया वाले दिन लोग घर में सोना-चांदी खरीदने हैं। वह ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि ऐसा माना जाता है कि अक्षय क्रिया वाले दिन अगर घर में मां लक्ष्मी की कृपा हो जाए तो कभी भी पैसों की कमी नहीं होती है। और उसे घर में अक्षय की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही आज के दिन लोग जैसा व्यवहार या जैसा कार्य करते हैं उन्हें उनके जीवन में वैसा ही फल की प्राप्ति होती है।

इन मंत्रों का करें जाप

लक्ष्मी बीज मंत्र – ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः॥

महालक्ष्मी मंत्र – ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

लक्ष्मी गायत्री मंत्र – ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:

धनाय नमो नम:

ॐ लक्ष्मी नम:

ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम:

लक्ष्मी नारायण नम:

पद्मानने पद्म पद्माक्ष्मी पद्म संभवे तन्मे भजसि पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम्

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:

ॐ धनाय नम:

ॐ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये, धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा:

ऊं ह्रीं त्रिं हुं फट

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डिसक्लेमर

इस लेख में प्रस्तुत किया गया अंश किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की पूरी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारियां विभिन्न स्रोतों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/प्रामाणिकताओं/धार्मिक प्रतिष्ठानों/धर्मग्रंथों से संग्रहित की गई हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य सिर्फ सूचना प्रस्तुत करना है, और उपयोगकर्ता को इसे सूचना के रूप में ही समझना चाहिए। इसके अतिरिक्त, इसका कोई भी उपयोग करने की जिम्मेदारी सिर्फ उपयोगकर्ता की होगी।

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