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Mohini Ekadashi: मोहिनी एकादशी के दिन करें विष्णु भगवान के मंत्रों के जाप, जानिए महत्व और पूजा विधि

मोहिनी एकादशी का काफी महत्व है इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करके उनका व्रत रखने का नियम है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। 19 May 2024। हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत रखने का बहुत ही महत्व है। एकादशी भी कई प्रकार की होती है उनका अलग-अलग महत्व भी होता है। पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोहिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन आप विष्णु भगवान के मंत्रों का जाप करके उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं और आज के दिन काफी अच्छा योग भी बनने जा रहा है।

मोहिनी एकादशी का महत्व

इस बार की मोहिनी एकादशी काफी खास मानी जा रही है क्योंकि इस बार काफी अच्छा योग बन रहा है। इस बार द्विपुष्कर योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, शुक्रादित्य योग, राजभंग योग और लक्ष्मी नारायण योग होने का रहा है। ऐसे योग में भगवान विष्णु की पूजा करके आप उनकी कृपा पा सकते हैं। इसके साथ ही आपके जीवन में चल रही सभी परेशानियों का भी अंत हो जाएगा।

पूजा विधि

मोहिनी एकादशी के दिन आप जल्दी सुबह उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद मंदिर जाएं और अगर घर पर ही आप पूजा कर रहे हैं तो एक लकड़ी की चौकी बनाएं और उसमें कपड़ा रख कर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें। भगवान को चंदन का तिलक जरूर लगाएं। भगवान विष्णु को पीले रंग के फूल अर्पित करें और साथ ही धूप, दीप चढ़ाएं। मोहिनी एकादशी की कथा का पाठ अवश्य करें क्योंकि इसके बिना व्रत व पूजा अधूरी मानी जाती है। पूजा करने के बाद आप दान भी करें। लेकिन ध्यान रहे आज के दिन घर में चावल कोई न खाए।

इन मंत्रों का करें जाप

ॐ नारायणाय नम:।

ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

ऊं नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

ओम नमो भगवते वासुदेवाय

ओम ह्रीं श्रीं लक्ष्मीवासुदेवाय नमः

ओम भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।

ओम भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।

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डिसक्लेमर

इस लेख में प्रस्तुत किया गया अंश किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की पूरी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारियां विभिन्न स्रोतों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/प्रामाणिकताओं/धार्मिक प्रतिष्ठानों/धर्मग्रंथों से संग्रहित की गई हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य सिर्फ सूचना प्रस्तुत करना है, और उपयोगकर्ता को इसे सूचना के रूप में ही समझना चाहिए। इसके अतिरिक्त, इसका कोई भी उपयोग करने की जिम्मेदारी सिर्फ उपयोगकर्ता की होगी।

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