नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय देवता माना जाता है। इसलिए किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य की शुरुआत उनकी पूजा से होती है। बुधवार का दिन विशेष रूप से गणेश जी को समर्पित है और इस दिन उनकी विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन के दुख और संकट दूर होते हैं। वैसे तो भगवान गणेश को मोदक अत्यंत प्रिय हैं, लेकिन गजमुख होने के कारण कुछ विशेष फल भी उन्हें अर्पित करने से वे विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं। बुधवार के दिन इन फलों का भोग लगाने से आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।
गणेश जी को प्रिय पांच फल
केला – भगवान गणेश को केला बेहद पसंद है। ध्यान रहे कि केले का भोग हमेशा जोड़े में ही लगाना चाहिए, कभी अकेला नहीं। बुधवार के दिन केले का भोग अर्पित करने से पूजा सफल होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
अमरूद – यह फल भी गणेश जी को बहुत प्रिय है। मान्यता है कि अमरूद अर्पित करने से सभी कार्यों में सफलता मिलती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
बेल – बेल का फल, फूल और पत्र शिवजी की पूजा में तो महत्वपूर्ण हैं, लेकिन शिवपुत्र गणेश को भी बेल अत्यंत प्रिय है। बुधवार को बेल अर्पित करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
जामुन – पंचफलों में जामुन भी गणेश जी को प्रिय है। मौसमी फल होने के कारण यह आसानी से उपलब्ध होता है। बुधवार के दिन बप्पा को जामुन चढ़ाने के बाद इसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण करने से भगवान विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं।
सीताफल (शरीफा) – इसे सीताफल या शरीफा भी कहा जाता है। गणेश जी की पूजा में इस फल का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना गया है। इससे पूजा पूर्ण होती है और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा विधि
भगवान गणेश की पूजा और व्रत से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी संकट टालने में मदद मिलती है। बुधवार को इन फलों के साथ विधिपूर्वक गणेश पूजा करने से घर-परिवार में खुशहाली बनी रहती है।
बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है और सभी प्रकार के विघ्न दूर होते हैं।बुधवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।पूजा स्थल को साफ करें और गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।एक चौकी या आसन पर गणेश जी की प्रतिमा/तस्वीर स्थापित करें।हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर अपनी मनोकामना कहते हुए पूजा का संकल्प लें।गणेश जी को हल्दी, कुमकुम (रोली) और अक्षत (साबुत चावल) से तिलक लगाएं।शुद्ध जल अर्पित करें।उन्हें मौली (पवित्र धागा) या वस्त्र अर्पित करें।लाल रंग के फूल (जैसे गुड़हल) या अन्य मौसमी फूल अर्पित करें।
भगवान गणेश को दूर्वा घास (दूब) अति प्रिय है।
भगवान गणेश को दूर्वा घास (दूब) अति प्रिय है। दूर्वा की 21 गांठें बनाकर उन्हें अर्पित करें। यह पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।घी का दीपक जलाएं और सुगंधित धूप/अगरबत्ती जलाएं।गणेश जी को उनके प्रिय खाद्य पदार्थ अर्पित करें।मोदक, लड्डू (विशेष रूप से बेसन या बूंदी के) या गुड़ और तिल से बनी वस्तुएं।ऊपर बताए गए फल जैसे केला (जोड़े में), अमरूद, सीताफल, आदि अर्पित करें।गणेश जी के किसी भी प्रिय मंत्र का 108 बार जाप करें।
जैसे: ॐ गं गणपतये नमः इसके बाद गणेश चालीसा या गणेश जी की कथा का पाठ करें।अंत में कपूर या घी के दीपक से भगवान गणेश की आरती करें।पूजा के बाद प्रसाद (भोग) परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों में वितरित करें और स्वयं भी ग्रहण करें।बुधवार के दिन गणेश जी को तुलसी कभी अर्पित न करें, क्योंकि इसे वर्जित माना गया है।इस दिन हरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।





