नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार में होने वाले 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो चुकी है। इस बार भी सभी की नजरें महिला मतदाताओं पर टिकी हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में 243 में से 167 सीटों पर महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा वोट डाले थे। खासकर उत्तर बिहार में यह ट्रेंड और भी मजबूत था, जहां एनडीए को बड़ी जीत मिली थी।
महिलाओं की ताकत को पहचान रहे हैं नेता
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35% आरक्षण देने की घोषणा की है। यह कदम महिला वोटरों को लुभाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पिछले 15 सालों से नीतीश सरकार ने साइकिल योजना, स्कॉलरशिप, और महिला आरक्षण जैसी योजनाओं से महिलाओं के बीच एक मजबूत पकड़ बनाई है।
2010 से शुरू हुआ बदलाव, आज महिलाएं तय कर रही हैं हार-जीत
बिहार की राजनीति में महिला वोटरों का असर 2010 से दिखना शुरू हुआ। उस साल पहली बार महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा था 54% महिलाओं ने वोट डाला जबकि पुरुषों का प्रतिशत 51% था। इसके बाद 2015 में यह अंतर और बढ़ गया, जहां 60% महिलाएं वोट देने पहुंचीं, जबकि पुरुषों का प्रतिशत सिर्फ 50% रहा।
2020 में कुछ सीटों पर महिलाओं ने पुरुषों से 22% ज्यादा वोट डाले
2020 के चुनावों में बैसी पूर्णिया सीट पर महिलाओं ने पुरुषों से 22% अधिक वोट डाले। इसी तरह कुशेश्वरस्थान दरभंगा में यह अंतर 21% रहा। ये दोनों सीटें एनडीए ने जीतीं। वहीं पटना की बिक्रम सीट पर पुरुषों ने महिलाओं से ज्यादा वोट डाले और यह सीट महागठबंधन को मिली।
1962 में महिलाओं का वोट प्रतिशत सिर्फ 32% था
अगर पीछे जाएं तो 1962 में पुरुषों का वोट प्रतिशत 55% था, जबकि महिलाओं का सिर्फ 32%। ये अंतर 2000 तक बना रहा। 2005 में यह फासला थोड़ा कम हुआ, और 2010 से महिलाओं ने वोटिंग में पुरुषों को पीछे छोड़ना शुरू कर दिया।
उत्तर बिहार में महिला वोटरों का दबदबा
उत्तर बिहार के जिलों जैसे मधुबनी, सीतामढ़ी, सुपौल और दरभंगा में महिला वोटरों का असर साफ दिखाई दिया। मधुबनी की 10 में से 8 सीटें एनडीए ने जीतीं। सुपौल की सभी 5 सीटें एनडीए के खाते में गईं। सीतामढ़ी में 8 में से 6 और दरभंगा में 10 में से 9 सीटों पर एनडीए को जीत मिली, 2025 के विधानसभा चुनाव में भी महिला वोटरों का रुख अहम भूमिका निभाएगा। अब राजनीतिक दलों की रणनीतियां महिलाओं को केंद्र में रखकर बनाई जा रही हैं, क्योंकि यह साफ हो चुका है बिहार की महिलाएं अब सिर्फ वोटर नहीं, बल्कि “किंगमेकर” बन चुकी हैं।





