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Sunday, March 15, 2026
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Bihar Election 2025: ओवैसी की पार्टी AIMIM को महागठबंधन में क्यों नहीं मिली जगह? क्‍या है खास वजह

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को महागठबंधन में शामिल करने से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस ने साफ इनकार कर दिया है।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की तारीख का ऐलान जल्‍दी ही हो सकता है। इसके लिए चुनाव आयेाग ने पूरी तैयारियां कर ली है। राज्‍य के चुनाव को ध्‍यान में रखते हुए राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। इस बीच, मुस्लिमों के फायरब्रांड नेता और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को महागठबंधन में शामिल करने से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस ने साफ इनकार कर दिया है।

इससे पहले AIMIM के बिहार अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने आरजेडी के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को पत्र लिखकर गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई थी, ताकि धर्मनिरपेक्ष वोटों का बंटवारा रोका जा सके। लेकिन, RJD और कांग्रेस ने इसे खारिज कर दिया। जिसके पीछे धार्मिक ध्रुवीकरण और वोट बैंक की रणनीति प्रमुख कारण हैं।

राज्‍य में पारंपरिक मुस्लिम-यादव (MY) वोट बैंक

बिहार में इस बार के चुनाव में महागठबंधन में RJD, कांग्रेस और वामपंथी दल शामिल हैं। वह बिहार में अपने पारंपरिक मुस्लिम-यादव (MY) वोट बैंक रणनीति पर निर्भर है। असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM भी सीमांचल क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ रखती है। जहां 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 5 सीटें जीतने में कामयाब रही थाी। 

RJD को नुकसान पहुंचाएंगी AIMIM 

इस क्षेत्र में सबसे ज्‍यादा मुस्लिम वोटर्स है। यह इलाके मुस्लिम-बहुल हैं और AIMIM की मौजूदगी ने महागठबंधन के वोटों में सेंध लगाई थी जिससे NDA को अप्रत्यक्ष लाभ हुआ। वहीं, RJD का कहना है कि AIMIM की धार्मिक ध्रुवीकरण वाली छवि पूरे बिहार में गठबंधन की धर्मनिरपेक्ष अपील को नुकसान पहुंचा सकती है।

AIMIM की ध्रुवीकरण छवि

लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव हमेशा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के पक्ष में नहीं रहे है। उन्होंने हर चुनाव में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से दूरी बनाए रखी है। 2020 में भी RJD ने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) जैसे संगठनों को गठबंधन में लेने से मना कर दिया था, क्योंकि उनकी छवि कट्टरपंथी मानी जाती थी।

दोनों दलों के बीच अविश्वास बड़ा कारण 

ऐसे में AIMIM के साथ गठबंधन से RJD को डर है कि बीजेपी इसे ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ के रूप में परोस सकती है। जिससे हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण होना निश्चित है। इसके अलावा, 2020 में AIMIM के चार विधायकों का RJD में शामिल होना भी दोनों दलों के बीच अविश्वास का कारण बना। अख्तरुल इमान ने इसे ‘विश्वासघात’ करार दिया था जिसने बाद रिश्तों में तनाव बढ़ा। 

सीमांचल में सीमित प्रभाव

AIMIM की तरफ से बार-बार गठबंधन में शामिल करने की पेशकश के बावजूद RJD नेता मानते हैं कि उनकी मौजूदगी से सीमांचल में फायदा हो सकता है, लेकिन मिथिलांचल, चंपारण और मगध जैसे क्षेत्रों में गठबंधन को नुकसान होगा। RJD सांसद मनोज झा ने AIMIM को ‘सैद्धांतिक समर्थन’ देने की सलाह दी, लेकिन गठबंधन में शामिल करने से मना कर दिया। 

ये ‘एकतरफा प्यार’- ओवैसी 

कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने भी AIMIM को ‘सांप्रदायिक’ करार देते हुए गठबंधन की संभावना खारिज कर दी। दूसरी ओर, ओवैसी ने महागठबंधन के इनकार को ‘एकतरफा प्यार’ करार देते हुए तीसरा मोर्चा बनाने की बात कही है। यह रणनीति बिहार में नया सियासी समीकरण बना सकती है, लेकिन इसका असर महागठबंधन के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

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