नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । बिहार विधानसभा चुनाव का प्रचार जोरों पर है। पहले चरण की वोटिंग 6 नवंबर को होगी, इससे पहले नौ प्रमंडलों में मुकाबले की तस्वीर साफ होगी।
आज हम दरभंगा प्रमंडल पर नजर डालते हैं। इस प्रमंडल में कुल तीन जिले शामिल हैं: दरभंगा, सीतामढ़ी और मधुबनी। दरभंगा प्रमंडल का सियासी समीकरण क्या है? पिछली तीन बार यहां के सियासी समीकरण किसके पक्ष में रहे? 2020 किस दल को कितनी सीटों पर सफलता मिली थी? इस बार की चर्चित सीटें कौन सी हैं? आइये जानते हैं…
दरभंगा क्षेत्र का सियासी समीकरण क्या है?
बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से 30 सीटें दरभंगा प्रमंडल में आती हैं। यह प्रमंडल मिथिला क्षेत्र का हिस्सा है और इसमें तीन जिले दरभंगा, सीतामढ़ी और मधुबनी शामिल हैं, जिनमें प्रत्येक जिले की 10-10 विधानसभा सीटें हैं। इस बार अलीनगर सीट पर भाजपा ने लोकप्रिय मैथिली गायिका मैथिली ठाकुर को टिकट दिया है।
2020 में कैसे रहे थे नतीजे?
2020 बिहार विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच रहा। 243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए ने 125 सीटें जीतीं, जिसमें भाजपा को 74, जदयू को 43 और VIP व HAM को 4-4 सीटें मिलीं। महागठबंधन ने 110 सीटें जीतीं, जिसमें राजद 75 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बना।
साथ ही कांग्रेस को 19 सीटें मिलीं, जबकि वामदलों ने 16 सीटें जीतीं जिसमें भाकपा (माले) की 12 और भाकपा व माकपा को दो-दो सीटें मिलीं। अन्य दलों में AIMIM ने पांच, बसपा, लोजपा और निर्दलीयों ने एक-एक सीट पर जीत हासिल की।
दरभंगा प्रमंडल में किसे मिली थी बढ़त?
2020 के विधानसभा चुनाव में दरभंगा प्रमंडल में एनडीए ने शानदार प्रदर्शन किया। 30 में से 22 सीटें एनडीए के खाते में गईं, जबकि महागठबंधन को 8 सीटें मिलीं। दलवार देखें तो भाजपा को 11 और जदयू को 9 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।
2015 में कैसे थे नतीजे?
2015 बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। महागठबंधन में उस समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू, साथ ही राजद और कांग्रेस शामिल थीं। एनडीए में भाजपा के अलावा लोजपा, जीतन राम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा थीं।
2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन ने 178 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जबकि एनडीए को केवल 58 सीटों पर संतोष करना पड़ा। राजद को 80, जदयू को 71 और कांग्रेस को 27 सीटें मिलीं। एनडीए में भाजपा ने 53, लोजपा और रालोसपा ने दो-दो और हम ने एक सीट जीती। वाम दलों में तीनों सीटें भाकपा (माले) के खाते में गईं और चार सीटें निर्दलियों ने जीती थीं।
2015 में दरभंगा प्रमंडल में किसे मिली बढ़त?
दरभंगा प्रमंडल में 2015 के चुनाव में महागठबंधन ने दबदबा बनाया। एनडीए को केवल चार सीटें मिलीं, जिसमें भाजपा को तीन और रालोसपा को एक सीट मिली। महागठबंधन ने 26 सीटें जीती राजद को 11, जदयू को 13 और कांग्रेस को दो सीटों पर जीत हासिल हुई।
2010 में कैसे थे नतीजे?
2008 के परिसीमन के बाद 2010 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने एकतरफा जीत हासिल की। एनडीए में जदयू और भाजपा साथ थीं, जबकि राजद-लोजपा गठबंधन और कांग्रेस भी मैदान में थे। 243 सीटों में से एनडीए ने 206 सीटें जीती, राजद-लोजपा को 25 और कांग्रेस को केवल चार सीटों पर संतोष करना पड़ा।
बाकी सात सीटों में से छह निर्दलियों ने जीत हासिल की, जबकि चकाई सीट पर झामुमो के सुमित कुमार सिंह विजयी रहे। दलवार आंकड़ों के अनुसार, एनडीए की 206 जीत में जदयू को 115 और भाजपा को 91 सीटें मिलीं। राजद ने 22 और लोजपा ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की।
2010 में दरभंगा प्रमंडल में किसे मिली बढ़त?
2010 में दरभंगा प्रमंडल में एनडीए ने दबदबा बनाया और 23 सीटें जीतीं। राजद गठबंधन में केवल राजद को सात सीटें मिलीं। एनडीए में भाजपा को 11 और जदयू को 12 सीटें हासिल हुईं, जबकि कांग्रेस इस प्रमंडल में एक भी सीट नहीं जीत सकी।
इस चुनाव कौनसी सीटें हैं चर्चा में?
दरभंगा प्रमंडल की सबसे चर्चित सीटों में अलीनगर, फुलपरास, सरायरंजन और झंझारपुर शामिल हैं। ये विधानसभा क्षेत्र पिछले चुनावों में हमेशा सियासी सुर्खियों में रहे हैं और इस बार भी इन पर नजरें टिकी हुई हैं। आइए, इन सीटों की राजनीतिक हलचल और हालिया रुझानों पर एक नजर डालते हैं।
अलीनगर सीट
अलीनगर सीट दरभंगा प्रमंडल की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में से एक है। इस बार भाजपा ने लोक गायिका मैथिली ठाकुर को उम्मीदवार बनाया है, जबकि राजद ने विनोद मिश्रा को मैदान में उतारा है। वहीं, जनसुराज पार्टी ने बिप्लव कुमार चौधरी को उम्मीदवार बनाया है।
सरायरंजन सीट
सरायरंजन सीट पर इस बार जदयू के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वर्तमान मंत्री विजय चौधरी को ही टिकट मिला है। विजय चौधरी ने 2010 से लगातार तीन बार यहां जीत हासिल की है, जो इस सीट पर किसी अन्य उम्मीदवार के लिए रिकॉर्ड है। नीतीश कैबिनेट में कई विभागों के मंत्री रह चुके हैं। राजद ने अरबिंद कुमार साहनी और जनसुराज ने साजन कुमार मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है।
झंझारपुर सीट
झंझारपुर सीट की ऐतिहासिक महत्व है। 1972 में जगन्नाथ मिश्र ने यहां से जीतकर बिहार के मुख्यमंत्री का पद संभाला और 1990 तक लगातार जीतते रहे। बाद में उनके बेटे नीतीश मिश्र ने इस सीट की जिम्मेदारी संभाली। 2025 के चुनाव में उन्हें भाजपा से फिर टिकट मिला है। नीतीश मिश्र ने नीतीश कैबिनेट में गन्ना और पर्यटन समेत कई मंत्रालय संभाले। भाकपा ने राम नारायण यादव और जनसुराज ने केशवचंद्र भंडारी को उम्मीदवार बनाया है।
गौड़ा बौराम सीट
गौड़ा बौराम सीट इस बार चर्चा में है क्योंकि महागठबंधन में होने के बावजूद राजद और वीआईपी यहां आमने-सामने हैं। भाजपा ने सुजीत कुमार सिंह, वीआईपी ने संतोष सहनी और राजद ने अफजल अली को उम्मीदवार बनाया है, जिससे यहां मुकाबला काफी रोमांचक होने वाला है।
कल्याणपुर सीट
कल्याणपुर सीट इस बार हॉट सीटों में शामिल है, मुख्य रूप से जदयू के महेश्वर हजारी की वजह से। महेश्वर हजारी पहले समस्तीपुर से सांसद रह चुके हैं और इस बार जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। भाकपा (माले) ने यहां रंजीत राम को उम्मीदवार बनाया है।
जाले सीट
जाले सीट इस बार चर्चा में है क्योंकि शहरी विकास एवं आवास विभाग के मंत्री जीवेश कुमार मिश्रा यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने उन्हें फिर से अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने ऋषि मिश्रा को मैदान में उतारा है।




