नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। बिहार में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक तूफान बनकर उभरा है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सीधे चैलेंज करते हुए कहा है कि अगर हिम्मत है तो विधानसभा का विशेष सत्र बुलाओ, हम 65% आरक्षण को संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल करवा कर दिखाएंगे
तेजस्वी यादव ने लिखा था 2 पन्नों का पत्र
4 जून को तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दो पन्नों का पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने महागठबंधन सरकार के समय बढ़ाए गए 65% आरक्षण को 9वीं अनुसूची में लाने की मांग की थी। उनका कहना है कि यह सामाजिक न्याय के लिए ज़रूरी कदम है। लेकिन चार दिन बीतने के बाद भी नीतीश सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया, जिससे नाराज होकर तेजस्वी ने अब प्रेस नोट के ज़रिए चैलेंज किया है। तेजस्वी यादव ने अपने बयान में लिखा: “क्या नीतीश जी ने मेरे पत्र का जवाब इसलिए नहीं दिया क्योंकि उनके पास कोई जवाब नहीं है, या फिर वो आदतन चुप रहते हैं?” तेजस्वी का यह भी आरोप है कि सामाजिक न्याय की बात करने वाले दल आज इस मांग पर चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि केंद्र में उनकी मोदी सरकार चल रही है।
एनडीए नेताओं पर भी साधा निशाना
तेजस्वी ने नीतीश कुमार, चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी जैसे नेताओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ये सभी नेता दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्गों की हकमारी पर चुप क्यों हैं? “अगर प्रधानमंत्री से इतनी छोटी मांग भी नहीं मनवा सकते तो ऐसी राजनीति और ऐसे गठबंधन में रहना धिक्कार है।
‘विशेष सत्र बुलाओ, हम लागू करेंगे’
तेजस्वी यादव ने खुले शब्दों में चुनौती दी कि अगर मुख्यमंत्री और एनडीए के नेता दिल से आरक्षण के समर्थन में हैं, तो वे विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाएं। “हम देखेंगे कैसे इस आरक्षण को लागू कराते हैं।” संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल किए गए कानूनों को न्यायिक समीक्षा से छूट मिलती है। तेजस्वी यादव चाहते हैं कि 65% आरक्षण को इस सूची में लाया जाए ताकि कोई अदालत इसे रद्द न कर सके। बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 से पहले आरक्षण का मुद्दा फिर से केंद्र में आ गया है। तेजस्वी यादव ने इसे राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बना दिया है। अब देखना होगा कि नीतीश कुमार और एनडीए इस चुनौती का क्या जवाब देते हैं।





