नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। नालंदा जिले के राजगीर स्थित कन्वेंशन सेंटर में आयोजित संविधान सुरक्षा सम्मेलन में राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा।
जाति जनगणना को लेकर सरकार पर दबाव बनाने का दावा
राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि कांग्रेस शुरू से ही जातिगत जनगणना की मांग करती रही है। उन्होंने बताया कि लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी से उन्होंने खुद यह मांग की थी। राहुल का दावा है कि कांग्रेस के दबाव में आकर केंद्र सरकार को देशभर में जातिगत जनगणना कराने की घोषणा करनी पड़ी। “जाति जनगणना के बाद हम जरूरी कार्रवाई करेंगे, लेकिन फिलहाल उसकी जानकारी साझा नहीं कर सकते,” राहुल गांधी ने देश में सामाजिक न्याय के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि पिछड़े, अति पिछड़े और दलित वर्ग के लोगों की बड़ी संस्थानों में भागीदारी बेहद कम है। उन्होंने बताया कि देश की 90 फीसदी आबादी बड़े पदों पर दिखाई नहीं देती। बड़ी कंपनियों का कर्ज तो माफ कर दिया जाता है, लेकिन गरीब, आदिवासी और पिछड़ों का कर्ज कभी माफ नहीं होता,”
रोजगार के मुद्दे पर नीतीश सरकार को घेरा
राहुल गांधी ने बिहार से युवाओं के पलायन का मुद्दा उठाते हुए नीतीश सरकार पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि पहले राजगीर सत्य, अहिंसा और न्याय की धरती कहलाती थी, लेकिन अब इसे ‘अपराध की राजधानी’ कहा जाने लगा है। बिहार के लोग नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते हैं, क्योंकि यहां रोजगार के मौके नहीं हैं,” – राहुल गांधी
मोदी पर अमेरिका के सामने ‘आत्मसमर्पण’ का आरोप
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा और कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार कहा है कि उन्होंने मोदी को अमेरिका के सामने झुकने पर मजबूर किया। “हमारा प्रधानमंत्री विरोध में एक शब्द भी नहीं बोल पा रहे हैं, क्योंकि ट्रंप ने जो कहा, वह सच है,” राहुल गांधी ने भाजपा पर जातिगत जनगणना न कराने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसा करने से भाजपा की जाति आधारित राजनीति खत्म हो जाएगी। उन्होंने मोदी पर तंज कसा कि वे खुद को ओबीसी बताते हैं, लेकिन फिर यह भी कहते हैं कि भारत में कोई जाति नहीं है।
क्या जनता बदलेगी मन?
राहुल गांधी के इन बयानों के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या जनता कांग्रेस की बातों से प्रभावित होकर अपने फैसले पर दोबारा सोचती है या फिर एनडीए गठबंधन एक बार फिर से अपना प्रभाव कायम रखता है। राहुल गांधी ने जाति जनगणना, रोजगार, सामाजिक न्याय और केंद्र सरकार की नीतियों को चुनावी मुद्दा बनाते हुए एक आक्रामक शुरुआत की है। अब देखना है कि इस नई चाल का जनता पर क्या असर होता है।




