नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए प्रशांत किशोर (PK) की पार्टी जन सुराज ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस लिस्ट में कुल 9 नाम शामिल हैं, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा में हैं भोजपुरी गायक और अभिनेता रितेश पांडे और प्रीति किन्नर।
करगहर से उतरेंगे रितेश पांडे
भोजपुरी फिल्मों और गानों के सुपरस्टार रितेश पांडे को जनसुराज ने रोहतास जिले की करगहर विधानसभा सीट से टिकट दिया है। यही वह सीट है, जहां से खुद प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने की चर्चा थी। रितेश ने टिकट मिलने के बाद कहा, “मैं बिहार के लोगों की आवाज बनना चाहता हूं और जनता की सेवा करना मेरा उद्देश्य है।” पार्टी को उम्मीद है कि रितेश की लोकप्रियता और युवा कनेक्शन जनसुराज को नई ऊर्जा देगा।
प्रीति किन्नर को भोरे सीट से टिकट
गोपालगंज जिले की भोरे सीट से जनसुराज ने प्रीति किन्नर को उम्मीदवार बनाया है। यह फैसला पार्टी की समावेशी राजनीति की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रीति लंबे समय से समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, “मैं उन लोगों की आवाज बनूंगी जिन्हें राजनीति में जगह नहीं दी जाती। यह लड़ाई समानता की है।
किसे मिला कहां से टिकट?
प्रीति किन्नर – भोरे (गोपालगंज) विधानसभा से उम्मीदवार होगी।
आर.के. मिश्रा- दरभंगा सदर विधानसभा से उम्मीदवार है।
किशोर मुन्ना – सहरसा शहर विधानसभा से उम्मीदवार है।
पूर्व एडीजी जे.पी. सिंह – छपरा शहर विधानसभा से उम्मीदवार है।
अजीत राम -इमामगंज विधानसभा से उम्मीदवार है।
रितेश पांडे- करगहर (रोहतास) विधानसभा से उम्मीदवार है।
के.सी. सिन्हा- कुम्हार विधानसभा से उम्मीदवार है।
पवन किशोर – शेरघाटी विधानसभा से उम्मीदवार है।
वाई.वी. गिरि – मांझी (सारण) विधानसभा से उम्मीदवार है।
क्या प्रशांत किशोर खुद लड़ेंगे चुनाव?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशांत किशोर खुद चुनाव लड़ेंगे? हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था। अगर मैं लड़ूंगा, तो अपनी जन्मभूमि या कर्मभूमि से हालांकि, उन्होंने अभी तक अपनी सीट का ऐलान नहीं किया है। जनसुराज पार्टी का कहना है कि उसका मकसद बिहार की पुरानी जातीय और परिवारवादी राजनीति को बदलना है। पार्टी ने सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं और अलग-अलग समुदायों के चेहरों को मौका देकर यह दिखाने की कोशिश की है कि वह “हर वर्ग की आवाज” बनना चाहती है। जनसुराज की इस लिस्ट के बाद बिहार की राजनीति में नया उबाल आ गया है। अब एनडीए और महागठबंधन दोनों को अपनी रणनीति फिर से सोचनी पड़ सकती है। चिराग पासवान, मुकेश सहनी और तेजस्वी यादव जैसे नेता पहले से अपनी-अपनी पार्टी को लेकर सक्रिय हैं। ऐसे में पीके का यह दांव चुनावी समीकरण को पूरी तरह बदल सकता है।





