नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एक तरफ जहाँ NDA (BJP-89, JDU-85) को बंपर बहुमत मिला है, वहीं चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर (PK) की जन सुराज पार्टी का चुनाव में खाता भी नहीं खुला। इस करारी हार ने प्रशांत किशोर को झकझोर कर रख दिया है।
प्रशांत किशोर ने मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में अपनी हार को स्वीकार करते हुए अपने दिल की बात कही, पीके ने स्वीकार किया कि, चुनाव परिणाम उनके लिए बहुत बड़ा झटका है। उन्होंने कहा, मैं ईमानदारी से कहूं तो नतीजे आने के बाद मैं ठीक से सो नहीं पाया हूँ क्योंकि जन सुराज ने अपेक्षा से कहीं कम प्रदर्शन किया।हालांकि, उन्होंने हार मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, जब तक आप अंदर से हार नहीं मानते तब तक आप हारे नहीं हैं।
जन सुराज का प्रदर्शन
जन सुराज पार्टी ने इस चुनाव में पहली बार बड़े पैमाने पर चुनाव लड़ा था।पार्टी ने 243 में से 228 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे।जन सुराज को बिहार में करीब 16.74 लाख वोट मिले, जो कुल वोट प्रतिशत का 3.34 प्रतिशत है। पीके ने इसे एक नई पार्टी के लिए छोटा नहीं माना। पार्टी एक भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर पाई और कई सीटों पर वोट शेयर काफी कम रहा, हालांकि, उन्हें ग्रामीण इलाकों में उम्मीद से ज्यादा समर्थन मिला, जो जीत में तब्दील नहीं हो पाया।
लंबी लड़ाई और सिद्धांतों पर कायम
प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि, उनकी राजनीति किसी चुनावी जीत-हार से आगे की है और यह एक लंबी लड़ाई है।उन्होंने कहा कि अगर बिहार को बदलना है, तो एक चुनाव से हारकर पीछे नहीं हट सकते और वह इसे पूरी ताकत के साथ जारी रखेंगे। प्रशांत किशोर यही नही रुके उन्होनें आगे कहा-उन्हें वोट न मिलना कोई अपराध नहीं लगता। । उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने चुनाव में कभी जाति या धर्म का सहारा नहीं लिया और आगे भी ऐसा नहीं करेंगे।उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि वह बिहार से जाने वाले नहीं हैं और जन सुराज का काम जारी रहेगा।पीके ने स्पष्ट किया कि उन्होंने चुनाव में कभी जाति या धर्म का सहारा नहीं लिया और भविष्य में भी नहीं लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह बिहार से नहीं जाएंगे और जन सुराज का काम जारी रहेगा।
सहयोगी दलों के साथ NDA ने 243 सीटों में से 174 सीटों पर दर्ज की ऐतिहासिक जीत
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों में NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने स्पष्ट और प्रचंड बहुमत हासिल किया है, जिससे राज्य में एक बार फिर नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है।
NDA का ऐतिहासिक प्रदर्शन
भारतीय जनता पार्टी (BJP)- 89
जनता दल यूनाइटेड (JDU)- 85
अन्य सहयोगी दल- 24
NDA का कुल योग-198/243
बहुमत का आँकड़ा- 122
NDA को मिली सीटें- 198
जीत का अंतर-NDA ने बहुमत के आंकड़े (122) से 76 सीटें अधिक जीती हैं।
बीजेपी और जेडीयू का प्रदर्शन
89 सीटों पर जीत के साथ, बीजेपी इस चुनाव में सबसे बड़ी एकल पार्टी बनकर उभरी है। इस शानदार प्रदर्शन ने राज्य की राजनीति में उसका कद और बढ़ा दिया है।जनता दल यूनाइटेड नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू ने 85 सीटें जीतकर गठबंधन की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
नतीजों का निहितार्थ
चुनाव के बाद नीतीश कुमार को NDA विधायक दल का नेता चुना गया है, जिसका मतलब है कि वह गठबंधन सरकार में एक बार फिर मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। जिसमें बीजेपी के दो नेता, सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा, उप-मुख्यमंत्री बनेंगे। वहीं परिणामों के तुरंत बाद, नीतीश कुमार ने इस्तीफा देकर नई सरकार बनाने का दावा पेश किया है। शपथ ग्रहण समारोह कल यानी गुरुवार दोपहर 1:30 बजे पटना के गांधी मैदान में होगा। एनडीए की इस जीत ने बिहार की राजनीति में गठबंधन की स्थिरता और जनता के बीच उसके विश्वास को मजबूत किया है।





