नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार के सभी मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। डॉक्टरों की हड़ताल का सीधा असर मरीजों पर पड़ा है और पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) समेत राज्य के अन्य अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं।
क्यों कर रहे हैं जूनियर डॉक्टर हड़ताल?
जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें अभी 20 हजार रुपये स्टाइपेंड मिलता है, जबकि अन्य राज्यों में यह राशि 40 हजार रुपये है। डॉक्टरों की मांग है कि बिहार में भी स्टाइपेंड को दोगुना किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हर तीन साल पर स्टाइपेंड बढ़ाने का नियम है, लेकिन बिहार में स्वास्थ्य विभाग इस नियम को नजरअंदाज करता रहा है।
काला बिल्ला लगाकर हड़ताल
डॉक्टरों ने बताया कि वे पिछले शनिवार से काला बिल्ला लगाकर विरोध कर रहे थे। सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया, तो आज से उन्होंने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। ओपीडी सेवाएं बंद होने से अस्पतालों में इलाज कराने आए मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मरीज घंटों इंतजार करने के बाद निराश होकर लौट गए। डॉक्टरों का कहना है कि अभी उन्होंने इमरजेंसी सेवाएं बंद नहीं की हैं, लेकिन अगर सरकार ने उनकी मांगों को अनसुना किया तो वे इमरजेंसी सेवा भी ठप कर देंगे।
डॉक्टरों का साफ संदेश
हड़ताल कर रहे एक जूनियर डॉक्टर ने कहा,”हम लोग मजबूरी में हड़ताल कर रहे हैं। मरीजों को दिक्कत होगी, लेकिन हमारी भी परेशानी है। सरकार अगर हमें 40 हजार स्टाइपेंड दे सकती है तो समस्या खत्म हो जाएगी। जूनियर डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री और सचिव से कई बार लिखित में मांग की थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक स्टाइपेंड की मांग पूरी नहीं होती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। यह आंदोलन पहली बार नहीं है। जूनियर डॉक्टर पहले भी कई बार इसी मांग को लेकर सड़कों पर उतर चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है। इस बार वे आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं।




