नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल के दिनों में जिस तरह से लगातार घोषणाएं की हैं, उससे साफ है कि उनका फोकस अब पूरी तरह सोशल सेक्टर और वोट बैंक मैनेजमेंट पर केंद्रित है। नीतीश कुमार ने सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति अपनाते हुए उन वर्गों पर खास ध्यान दिया है जो चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। चाहे वह ओबीसी, अति पिछड़ा वर्ग या महिलाओं और युवाओं से जुड़ी योजनाएं हों, हर मोर्चे पर उनका प्रयास एक मजबूत जनाधार खड़ा करने का है। नीतीश कुमार ने 2025 विधानसभा चुनाव से पहले बिहार की सियासी जमीन को नए सिरे से तैयार करना शुरू कर दिया है।
नीतीश ने साधा बड़ा वोट बैंक
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर सियासी करंट छोड़ दिया है। उनकी नई योजना हर महीने 125 यूनिट मुफ्त बिजली से सीधे तौर पर राज्य के 1 करोड़ 86 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को राहत दी है। जिनका बिजली बिल अब पूरी तरह माफ हो गया है। इस फैसले से बिहार की लगभग 90% आबादी को सीधा लाभ हो रहा है। राजनीतिक रूप से देखा जाए तो इसका सबसे गहरा असर ग्रामीण और निम्न-मध्यम वर्गीय वोटरों पर पड़ रहा है, जहां इसकी जबरदस्त चर्चा है। हाल ही में हुए एक सर्वे में 63% लोगों ने माना कि यह योजना नीतीश कुमार के लिए सत्ता की राह आसान कर सकती है।
पेंशन राशि बढ़ाकर नीतीश ने खेला बड़ा दांव
बीते दो महीनों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ा दांव खेला है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि को 400 रुपये से बढ़ाकर सीधे 1100 रुपये कर दिया गया है। इस फैसले से 1 करोड़ 12 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं, जिनमें बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांगजन प्रमुख रूप से शामिल हैं। यह वही वर्ग है जो चुनावों में सबसे ज्यादा सक्रिय और स्थायी वोट बैंक के रूप में जाना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घोषणा के जरिए नीतीश कुमार ने खुद को ‘संवेदनशील और जनहितैषी मुख्यमंत्री’ के रूप में प्रस्तुत किया है।
युवाओं को नौकरी और रोजगार का वादा
बिहार की राजनीति में एक और बड़ा दांव खेलते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने युवाओं को साधने की कवायद तेज कर दी है। अब तक 10 लाख सरकारी नौकरियां और 39 लाख से अधिक रोजगार देने का दावा कर चुके नीतीश कुमार ने चुनावी रणनीति के तहत इस लक्ष्य को और आगे बढ़ाया है। अब राज्य सरकार का नया टारगेट है 2025 के अंत तक 12 लाख सरकारी नौकरियां और 50 लाख रोजगार। यही नहीं, मुख्यमंत्री ने अगले पांच साल में 1 करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार देने का वादा कर डाला है।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह वादा न सिर्फ युवा वोट बैंक को साधता है, बल्कि उनके परिवारों को भी प्रभावित करता है, जो बिहार के चुनावी समीकरण में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं को मुख्यमंत्री की इस घोषणा से नई उम्मीद मिली है। साथ ही, औद्योगिक विकास और स्किल डेवलपमेंट जैसे मुद्दों को जोर देकर नीतीश कुमार ने लोगों में विकास की उम्मीद जगा दी है।
सर्वे का इशारा, नीतीश फिर से जनता की पहली पसंद
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लोकप्रियता एक बार फिर ऊंचाई पर है। हाल ही में हुए सी-वोटर सर्वे में 65% जनता ने उन्हें अपनी पहली पसंद के रूप में चुना है। यह सर्वे ऐसे समय आया है जब नीतीश सरकार लगातार जन-कल्याणकारी घोषणाओं से चुनावी जमीन तैयार कर रही है।
नीतीश कुमार की हालिया रणनीति में मुफ्त बिजली योजना, पेंशन बढ़ोतरी, रोजगार, नौकरी के वादे और सरकारी कर्मियों के मानदेय में सुधार जैसे फैसले शामिल हैं। इनका सीधा असर ग्रामीण, गरीब, बुजुर्ग, महिलाएं, दिव्यांगजन, युवा और सरकारी सेवकों पर पड़ा है। यानी लगभग हर प्रमुख वोट बैंक को उन्होंने किसी न किसी रूप में साधने की कोशिश की है। ये सभी फैसले चुनाव से ठीक पहले किया गया सुनियोजित मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है, जो नीतीश कुमार के लिए बड़ा चुनावी लाभ सुनिश्चित कर सकते हैं।




