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Friday, March 6, 2026
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Bihar Chunav: ‘ना CM बनना है, ना MLA-MP सिर्फ बिहार को बदलने आए हैं’- बोले प्रशांत किशोर

प्रशांत किशोर ने साफ कर दिया है कि उनका मकसद सिर्फ कुर्सी पाना नहीं, बल्कि बिहार को बदलना है। उन्होंने कहा, “ना मुझे मुख्यमंत्री बनना है, ना सांसद-विधायक। मैं सिर्फ बिहार को बदलने आया हूं।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। चुनावी रणनीतिकार से जन नेता बने प्रशांत किशोर ने साफ कर दिया है कि उनका मकसद सिर्फ कुर्सी पाना नहीं, बल्कि बिहार को बदलना है। उन्होंने कहा, “ना मुझे मुख्यमंत्री बनना है, ना सांसद-विधायक। मैं सिर्फ बिहार को बदलने आया हूं। प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार पिछले 50 सालों से वही गरीब और पिछड़ा राज्य बना हुआ है, जैसा 1975 में था। “अगर अब भी जनता नहीं चेती, तो अगले पांच साल फिर ऐसे ही निकल जाएंगे। यह बदलाव का निर्णायक समय है।

 “जाति-धर्म के नाम पर वोट नहीं, अब बात विकास की हो”

उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक जाति, धर्म और नाली-गाली के मुद्दों पर वोट डाले जाएंगे, तब तक असली विकास नहीं हो सकता। “बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य पर वोट दीजिए, तभी कुछ बदलेगा।” प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने सहरसा से मजदूर ट्रेन शुरू करने को उपलब्धि बताया था, प्रशांत किशोर ने कहा, “क्या ये गर्व की बात है कि बिहार के बच्चे मजदूरी के लिए गुजरात जाएं? क्या मोदी गुजरात में कह सकते हैं कि वहां के लोग तमिलनाडु जाकर मजदूरी करेंगे?

राहुल गांधी और रेवंत रेड्डी पर भी निशाना

तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी के ‘बिहारियों के डीएनए में मजदूरी’ वाले बयान पर उन्होंने कहा, “ये बिहार का अपमान है। राहुल गांधी ऐसे नेताओं को क्यों बढ़ावा दे रहे हैं?” उन्होंने स्पष्ट किया कि जन सुराज किसी बाहरी या पुराने नेता की पार्टी नहीं है – यह जनता की पार्टी है।

”नीतीश 2025 के बाद CM नहीं रहेंगे”

प्रशांत किशोर का दावा है कि ”2025 के चुनाव के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे। लगभग 60% जनता बदलाव चाहती है।” उन्होंने कहा कि प्रशासन के कुछ अधिकारी खुलेआम उनके खिलाफ काम कर रहे हैं, जो ‘सुशासन’ की पोल खोलता है। उन्होंने कहा, “अब बिहार के लोग सिर्फ दो गठबंधनों – एनडीए और इंडिया – तक सीमित नहीं हैं। अब तीसरा मजबूत विकल्प है – जन सुराज। जनता तय करे कि किसे चुनना है। प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति में एक नई लहर लाने का दावा किया है। उनका कहना है कि वे सत्ता की नहीं, बदलाव की राजनीति कर रहे हैं। अब देखना होगा कि जनता उनकी इस अपील पर कितना भरोसा जताती है।

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