नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । बिहार की सियासत में महागठबंधन ने नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।
मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में तेजस्वी यादव और डिप्टी सीएम के लिए वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी को चुनकर विपक्ष और जनता के बीच हलचल मचा दी है। विवाद और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
इस फैसले के बाद बिहार में मुस्लिम समुदाय में नाराजगी बढ़ती दिख रही है। कई मुस्लिम संगठनों और सोशल मीडिया यूजर्स ने 18 फीसदी आबादी वाले इस समुदाय को सत्ता में हिस्सेदारी न मिलने पर कड़ा विरोध जताया है और राजनीतिक सवाल उठाए हैं।
मुस्लिम सीएम की मांग पर चिराग पासवान का रुख
इस बीच, लोजपा (रामविलास) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने महागठबंधन पर जमकर हमला बोला। उन्होंने अपने पिता स्व. रामविलास पासवान के 2005 के उस रुख की याद दिलाई, जब बिहार में मुस्लिम मुख्यमंत्री की मांग की गई थी, लेकिन राजद उस समय भी तैयार नहीं था।
मुस्लिम सीएम बनाने के लिए पिता ने दी थी कुर्बानी- चिराग पासवान
चिराग पासवान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा पर लिखा कि 2005 में उनके पिता रामविलास पासवान ने मुस्लिम मुख्यमंत्री बनाने के लिए अपनी पार्टी तक कुर्बान कर दी थी, लेकिन तब मुस्लिम समुदाय ने उनका समर्थन नहीं किया।
चिराग पासवान ने आगे कहा, “आज 2025 में भी राजद न तो मुस्लिम समुदाय को मुख्यमंत्री देने को तैयार है, न उपमुख्यमंत्री। अगर आप केवल वोट बैंक बनकर रहेंगे, तो सम्मान और सशक्त भागीदारी कैसे मिल पाएगी?”
‘मुस्लिमों का केवल वोट बैंक के लिए इस्तेमाल’
चिराग पासवान ने यह भी आरोप लगाया कि महागठबंधन मुसलमानों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करता है। उन्होंने कहा, “तेजस्वी यादव यादव समुदाय से हैं, जिसकी आबादी 13 प्रतिशत है, जबकि मुकेश सहनी साहनी समुदाय से हैं, जिसकी आबादी केवल 2 प्रतिशत है।”
उन्होंने आगे कहा, “फिर भी तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी को मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बना दिया गया, जबकि 18 फीसदी आबादी वाले मुसलमानों को सत्ता में कोई स्थान नहीं मिला।”
बता दें कि, चिराग पासवान का यह बयान महागठबंधन के जातीय समीकरणों पर नई बहस छेड़ रहा है। साथ ही यह संकेत भी देता है कि, एनडीए इस बार मुस्लिम मतदाताओं को लेकर नई सियासी रणनीति अपना रहा है, जिससे बिहार चुनाव में उसे राजनीतिक लाभ मिल सकता है।





