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Monday, March 2, 2026
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बिहार सरकार में बीजेपी का पलड़ा भारी, विभाग बंटवारे में जेडीयू के मुकाबले बढत, बड़े मंत्रालयों पर कब्जा

बिहार में नई एनडीए सरकार में विभागों का बंटवारा हो चुका है। 26 मंत्रियों को विभाग बांटे गए हैं। इस बार विभाग बंटवारे में बीजेपी ने जेडीयू के मुकाबले बढ़त बनाई है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । बिहार में नई एनडीए सरकार बनने के बाद सत्ता संतुलन की तस्वीर अब पहले से ज्यादा साफ दिख रही है। मुख्यमंत्री की कुर्सी भले ही दोबारा नीतीश कुमार के पास हो, लेकिन उनके नेतृत्व वाली कैबिनेट में इस बार शक्ति-संतुलन पूरी तरह बदल गया है। शुक्रवार को हुए विभागीय बंटवारे में मंत्रियों की संख्या से लेकर अहम मंत्रालयों के वितरण तक, हर मोर्चे पर बीजेपी ने जेडीयू पर बढ़त बनाई है।

नई कैबिनेट में सबसे महत्वपूर्ण गृह विभाग डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को मिला है। लगभग 20 साल बाद पहली बार नीतीश कुमार ने गृह विभाग अपने पास नहीं रखा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि एनडीए सरकार में बीजेपी अब सीधे तौर पर ड्राइविंग सीट की तरफ बढ़ रही है। नीतीश कुमार भले ही मुख्यमंत्री हों, लेकिन सत्ता संचालन की वास्तविक कमान बीजेपी के हाथों में जाती दिख रही है।

सत्ता का संतुलन बदला, बीजेपी की पकड़ और मजबूत

बिहार कैबिनेट में विभागों का बंटवारा साफ बता रहा है कि असली सत्ता-तंत्र पर अब किसकी पकड़ मजबूत होती जा रही है। गृह विभाग पर पारंपरिक तौर पर मुख्यमंत्री का नियंत्रण माना जाता रहा है, क्योंकि इसमें पुलिस, प्रशासन और कानून–व्यवस्था जैसी अहम जिम्मेदारियां आती हैं। इसे सम्राट चौधरी को सौंपना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बीजेपी को नीतीश सरकार के केंद्र में आने का रास्ता मिल गया है।

इसके साथ ही कृषि, सहकारिता, वन-पर्यावरण, पर्यटन, श्रम संसाधन, पशुपालन, नगर विकास और पथ निर्माण जैसे बड़े और असरदार मंत्रालय भी बीजेपी के पास गए हैं। ये विभाग न सिर्फ व्यापक प्रशासनिक दखल रखते हैं, बल्कि गांव, किसान, युवा और शहरी मतदाताओं से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।

बीजेपी कोटे से रामकृपाल यादव को कृषि मंत्रालय मिलना भी महत्वपूर्ण संकेत है। यही वह विभाग है, जिसके आधार पर सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सब्सिडी व्यवस्था और किसान योजनाओं के जरिए एक बड़े वोट बैंक पर पकड़ मजबूत करती है।

सम्राट चौधरी की बढ़ी ताकत

गृह विभाग मिलते ही डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की राजनीतिक हैसियत अचानक कहीं अधिक ऊंची हो गई है। चुनाव प्रचार के दौरान अमित शाह ने इशारा दिया था कि सम्राट चौधरी की भूमिका और बड़ी की जाएगी और अब गृह मंत्रालय का मिलना उसी रणनीति की कड़ी माना जा रहा है। गृह मंत्री बनने के बाद उनकी सीधी पकड़ पुलिस और प्रशासनिक प्रणाली पर दिखेगी।

अब उनके पास क्राइम कंट्रोल की पूरी कमान होगी। सीमांचल की सुरक्षा और घुसपैठ जैसे संवेदनशील मुद्दों पर फैसले लेने का अधिकार भी उनके पास रहेगा। जिला प्रशासन से लेकर शीर्ष अधिकारियों तक सीधा नियंत्रण होगा और नीतीश सरकार के हर महत्वपूर्ण फैसले में उनकी भागीदारी तय मानी जा रही है। यह संकेत है कि आने वाले समय में प्रशासनिक स्तर पर बीजेपी का प्रभाव काफी मजबूत होने वाला है।

वित्त जेडीयू के पास, प्रभावशाली मंत्रालयों पर बीजेपी का दबदबा

जेडीयू ने वित्त मंत्रालय अपने पास रखा है और बिजेंद्र प्रसाद यादव को वित्त, ऊर्जा, वाणिज्य कर और मद्य निषेध जैसे विभाग दिए गए हैं। हालांकि वित्त विभाग महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव के लिहाज से गृह, कृषि, पथ निर्माण, नगर विकास, श्रम और पर्यटन जैसे विभाग जमीन पर कहीं बड़ा असर छोड़ते हैं और इन पर बीजेपी की पकड़ ज्यादा मजबूत दिख रही है। इसके अलावा, इस बार मंत्रियों की संख्या सीमित होने के कारण जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं को एक से अधिक विभागों की जिम्मेदारी दी गई है।

नीतीश के पास सीमित विभाग, भूमिका बनी औपचारिक

यह पहली बार है जब नीतीश कुमार के पास सबसे कम विभागों की जिम्मेदारी है। उन्होंने केवल सामान्य प्रशासन, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी और निर्वाचन विभाग अपने पास रखे हैं। ये सभी विभाग आमतौर पर सीएम ऑफिस की औपचारिक जिम्मेदारियों माने जाते हैं। इसके अलावा वे वही विभाग संभालेंगे जिन्हें किसी मंत्री को नहीं सौंपा गया है। यह साफ दिखाता है कि नीतीश कुमार की भूमिका अब अधिक सहमति-आधारित और प्रबंधन पर केंद्रित हो गई है, जबकि रोजमर्रा के शासन और प्रशासन की वास्तविक कमान बीजेपी के पास चली गई है।

विजय कुमार सिन्हा को मिले अहम विभाग

बीजेपी कोटे से डिप्टी सीएम बने विजय कुमार सिन्हा को राजस्व एवं भूमि सुधार और खान–भूतत्व जैसे अहम मंत्रालय दिए गए हैं। ये विभाग भूमि प्रबंधन और उद्योग क्षेत्रों से जुड़े हैं, जिनका सीधा असर निवेश, खनन और राजस्व व्यवस्था पर पड़ता है। यानी सत्ता के दोनों शीर्ष पद, दोनों डिप्टी सीएम बीजेपी के पास हैं और साथ ही उसके हाथ में प्रभावशाली मंत्रालय भी हैं।

नीतीश कैबिनेट का गठन : संख्या में आगे बीजेपी

नई नीतीश सरकार में कुल 26 मंत्रियों को शामिल किया गया है। इनमें बीजेपी के 14, जेडीयू के 8, जबकि एलजेपी (आर) के दो और हम व आरएलएम के एक-एक मंत्री हैं। संख्या के आधार पर साफ दिखता है कि इस बार गठबंधन में बीजेपी ‘बिग ब्रदर’ की भूमिका निभा रही है। इन 26 मंत्रियों में एक मुस्लिम, तीन महिलाएं और पहली बार विधानसभा पहुंचे तीन विधायक भी शामिल हैं।

बीजेपी कोटे से सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, मंगल पांडेय, डॉ. दिलीप जायसवाल, नितिन नवीन, रामकृपाल यादव, संजय सिंह, अरुण शंकर प्रसाद, सुरेंद्र मेहता, नारायण प्रसाद, रमा निषाद, लखेंद्र पासवान, श्रेयसी सिंह और डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी मंत्री बनाए गए हैं।

जेडीयू से विजय कुमार चौधरी, श्रवण कुमार, विजेंद्र यादव, अशोक चौधरी, लेसी सिंह, मो. जमा खान, मदन सहनी और डॉ. प्रमोद कुमार को मंत्रिमंडल में जगह मिली है।

इसके अलावा चिराग पासवान की पार्टी LJPR से संजय कुमार (पासवान) और संजय सिंह को पद दिया गया है, जबकि जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी की ओर से संतोष कुमार सुमन और दीपक प्रकाश मंत्री बने हैं।

पिछली बीजेपी-जेडीयू सरकार में विभागों का बंटवारा कैसे हुआ था

पिछली नीतीश सरकार में जेडीयू के पास गृह, सामान्य प्रशासन, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी, निर्वाचन, जल संसाधन, संसदीय कार्य, भवन निर्माण, परिवहन, शिक्षा, सूचना व जनसंपर्क, ऊर्जा, उत्पाद व निबंधन, ग्रामीण कार्य, योजना व विकास, मद्य निषेध, अल्पसंख्यक कल्याण, ग्रामीण विकास, समाज कल्याण, खाद्य व उपभोक्ता संरक्षण, विज्ञान, प्राविधिक एवं तकनीकी शिक्षा जैसे मंत्रालय थे।

जीतनराम मांझी की पार्टी को सूचना प्रौद्योगिकी तथा अनुसूचित जाति–जनजाति कल्याण विभाग मिले थे। वहीं बीजेपी के पास वित्त, स्वास्थ्य, खेल, पंचायती राज, नगर विकास व आवास, उद्योग, पशु एवं मत्स्य संसाधन, विधि, सहकारिता, पिछड़ा व अत्यंत पिछड़ा वर्ग कल्याण, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन, पर्यटन, कृषि, पथ निर्माण, भूमि सुधार, गन्ना उद्योग, खान व भू-तत्व, श्रम संसाधन, कला–संस्कृति–युवा और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण जैसे विभाग थे।

नीतीश कुमार ने बनाया रिकॉर्ड, 10वीं बार बने बिहार के मुख्यमंत्री

बिहार में एनडीए की नई सरकार का गठन हो चुका है। नीतीश कुमार ने 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की है। उन्होंने पहली बार नवंबर 2005 में मुख्यमंत्री पद संभाला था। इसके बाद उन्होंने 2010, 2015 (दो बार), 2017, 2020, 2022 (दो बार) और 2024 में भी शपथ ली। अब नीतीश कुमार अपना 10वां कार्यकाल शुरू कर चुके हैं और वह बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नेताओं में शुमार हो गए हैं।

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