नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, एक बार फिर राज्य की राजनीति में धनबल और बाहुबल की चर्चा तेज हो गई है। उम्मीदवारों के चुनावी हलफनामे बताते हैं कि इस बार मैदान में उतरे कई नेता करोड़पति हैं। बाहुबली नेताओं से लेकर उनके युवा वारिसों तक, सबकी संपत्ति करोड़ों में दर्ज है।
अनंत सिंह और नीलम देवी की संपत्ति 100 करोड़ पार
मोकामा से जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी इस चुनाव में सबसे संपन्न जोड़ी के रूप में सामने आए हैं। अनंत सिंह की संपत्ति 38 करोड़ नीलम देवी की संपत्ति 63 करोड़ नीलम देवी के पास तीन लग्जरी एसयूवी, करोड़ों की जमीन और सोने-हीरे के गहनों का बड़ा संग्रह है। यह जोड़ी बिहार की राजनीति में पावर और पैसे का मजबूत प्रतीक मानी जाती है।
मोकामा में रुतबे की जंग: सूरजभान बनाम अनंत सिंह
मोकामा सीट इस बार सबसे हाई-प्रोफाइल मानी जा रही है। आरजेडी प्रत्याशी वीणा देवी, पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की पत्नी हैं। वीणा देवी की संपत्ति 7 करोड़ डाकबंगला चौक, पटना में ₹6.95 करोड़ के दो फ्लैट 1.5 करोड़ के सोने के गहने यह मुकाबला केवल वोटों का नहीं, बल्कि रुतबे और संपन्नता का भी है।
नई पीढ़ी की एंट्री: विशाल प्रशांत की आधुनिक सोच
तरारी सीट से मैदान में उतरे विशाल प्रशांत, पूर्व विधायक सुनील पांडे के बेटे हैं। कुल संपत्ति 4 करोड़ 2.2 करोड़ की अचल संपत्ति पत्नी ऐश्वर्या राज के पास लगभग तीन किलो सोना विशाल प्रशांत अपने परिवार की विरासत और आधुनिक राजनीतिक सोच का मेल लेकर चल रहे हैं। ओसामा शहाब (RJD शहाबुद्दीन के बेटे हैं। संपत्ति 5 करोड़ 35 लाख की लक्जरी कार और 1.45 करोड़ की जमीन चेतन आनंद JDU आनंद मोहन सिंह के बेटे। संपत्ति 1.6 करोड़ दोनों युवा नेता बिहार की राजनीति में अपने पिता की विरासत को नई दिशा देने का दावा कर रहे हैं। लालगंज से आरजेडी प्रत्याशी शिवानी शुक्ला, बाहुबली मुन्ना शुक्ला की बेटी हैं, लेकिन उनका अंदाज बिल्कुल अलग है। एलएलएम लंदन यूनिवर्सिटी से चल संपत्ति 21 लाख 36 लाख का एजुकेशन लोन शिवानी शुक्ला बाहुबली विरासत से हटकर संवेदनशील और शिक्षित राजनीति का चेहरा बनने की कोशिश कर रही हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में साफ दिख रहा है कि राज्य की राजनीति अब केवल जाति या जनाधार पर नहीं, बल्कि धनबल, बाहुबल और प्रभाव के नए समीकरणों पर टिक रही है। जहां एक ओर करोड़ों की संपत्ति वाले उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, वहीं कुछ नए चेहरे पारदर्शिता और शिक्षा के दम पर अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं।





