नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियों के बीच सकरा विधानसभा सीट एक बार फिर सुर्खियों में है। यह सीट राज्य के 243 विधानसभा क्षेत्रों में से एक है और निर्वाचन क्षेत्र संख्या 92 के रूप में जानी जाती है। यह सीट अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित है, जो इसे राजनीतिक दृष्टि से और भी खास बनाती है। सकरा विधानसभा क्षेत्र मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है और यहां पर मुख्य मुकाबला राजद (RJD), जदयू (JDU), भाजपा (BJP) और कांग्रेस के बीच है।
गौरतलब है कि 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू के अशोक कुमार चौधरी ने कांग्रेस के उमेश कुमार राम को 1,537 वोटों के मामूली अंतर से हराकर यह सकरा सीट अपने नाम की थी। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के राज भूषण चौधरी ने कांग्रेस के अजय निषाद को 2,34,927 मतों से करारी शिकस्त देकर मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट पर कब्जा जमाया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सकरा सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प रहने वाला है और यहां का जातीय समीकरण व मौजूदा राजनीतिक लहर बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
सकरा निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं के आंकड़ों पर एक नजर
सकरा विधानसभा क्षेत्र की जनसांख्यिकी के आंकड़े इस क्षेत्र में मतदान व्यवहार और सामाजिक प्रतिनिधित्व को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 2020 के विधानसभा चुनाव में सकरा में कुल 2,64,916 पंजीकृत मतदाता थे। इनमें से 1,39,053 पुरुष, 1,25,858 महिला और 5 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल थे। उस वर्ष 671 डाक मत भी डाले गए थे। सेवा मतदाताओं की बात करें तो 2020 में इनकी संख्या 619 थी, जिनमें 591 पुरुष और 28 महिलाएं शामिल थीं।
वहीं, अगर 2015 के आंकड़ों से तुलना करें, तो उस वर्ष सकरा में कुल 2,41,844 मतदाता थे। इनमें 1,28,486 पुरुष, 1,13,356 महिलाएं और 2 तृतीय लिंग के मतदाता थे। उस वर्ष 698 वैध डाक मत दर्ज किए गए थे। 2015 में सेवा मतदाताओं की संख्या अधिक थी, कुल 774, जिनमें 679 पुरुष और 95 महिलाएं थीं। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि 2015 की तुलना में 2020 में सकरा निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की कुल संख्या में इजाफा हुआ है, साथ ही महिला मतदाताओं की भागीदारी भी बढ़ी है।
सकरा विधानसभा चुनाव 2020 -2015
सकरा विधानसभा क्षेत्र में पिछले दो विधानसभा चुनावों में अलग-अलग दलों का दबदबा देखने को मिला है, जिससे यह सीट आगामी चुनावों के लिए भी रोचक बन गई है। साल 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू उम्मीदवार अशोक कुमार चौधरी ने कांग्रेस के उमेश कुमार राम को हराकर यह सीट अपने नाम की थी। अशोक चौधरी को 67,265 वोट मिले, जबकि उमेश कुमार राम को 65,728 वोट मिले। जीत का अंतर मात्र 1,537 वोट रहा, जो दर्शाता है कि मुकाबला बेहद करीबी था। इस चुनाव में लोजपा के संजय पासवान ने 13,528 वोट हासिल किए और 8.09% वोट शेयर के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
साल 2015 में राजद के लाल बाबू राम ने यह सीट जीती थी। उन्हें 75,010 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के अर्जुन राम को 61,998 वोट मिले। लाल बाबू राम ने 13,012 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जो उस समय 8.58% का मार्जिन था। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सकरा सीट पर राजद, जदयू, कांग्रेस और भाजपा के बीच लगातार मुकाबला चलता रहा है और मतदाताओं का रुझान समय-समय पर बदलता रहा है। आगामी 2025 चुनाव में यहां का मुकाबला फिर से दिलचस्प हो सकता है।
सकरा विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
सकरा विधानसभा सीट पर अब तक कई राजनीतिक दलों ने कब्जा जमाया है। इस सीट पर कभी कांग्रेस, कभी जनता दल और अब जेडीयू व राजद के बीच सत्ता का पलड़ा झूलता रहा है। साल 1977 में शिवनंदन पासवान ने जनता पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1980 में कांग्रेस के फकीरचंद राम ने सीट जीती। 1985 में शिवनंदन पासवान ने फिर वापसी की, इस बार लोकदल के उम्मीदवार के रूप में। 1990 और 1995 के चुनावों में कमल पासवान ने जनता दल से जीत दर्ज की।
2000 में राजद के शीतल राम ने इस सीट पर कब्जा जमाया। फिर 2005 में हुए दोनों विधानसभा चुनावों (फरवरी और अक्टूबर) में जेडीयू के बिलट पासवान विजयी रहे। इसके बाद 2010 में भी जेडीयू के सुरेश चंचल ने जीत दर्ज की। इन नतीजों से यह साफ है कि सकरा विधानसभा सीट पर स्थानीय चेहरों और सामाजिक समीकरणों की बड़ी भूमिका रही है। पासवान समुदाय के प्रत्याशियों को यहां अक्सर समर्थन मिला है। साथ ही, राजनीतिक दलों की बदलती रणनीति और गठबंधन भी नतीजों को प्रभावित करते रहे हैं।





