नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों के ऐलान के बाद अब राज्य में आचार संहिता लागू हो गई है। ऐसे में खासतौर पर कैश के लेनदेन पर सख्त नजर रखी जाती है। अगर कोई बड़ी रकम लेकर चल रहा हो और उसका स्रोत या उद्देश्य स्पष्ट न कर सके, तो चुनाव आयोग उस कैश को जब्त कर लेगा। इस प्रक्रिया का मकसद चुनाव को निष्पक्ष और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाना है, ताकि अघोषित धन से चुनाव प्रभावित न हो सके। आइए जानते हैं कि आचार संहिता के दौरान चुनाव आयोग जो कैश जब्त करता है, उसका क्या होता है ?
आचार संहिता के दौरान जब्त कैश का क्या होता है?
चुनाव आयोग या पुलिस जब कोई कैश जब्त करती है, तो वह राशि आयकर विभाग को भेज दी जाती है। अगर रकम 10 लाख रुपए या उससे ज्यादा हो, तो इसे सीधे जिला ट्रेजरी में जमा किया जाता है और इनकम टैक्स के नोडल अधिकारी को सूचित किया जाता है। अगर आप साबित कर सकें कि यह पैसा आपकी वैध कमाई है और चुनाव से इसका कोई संबंध नहीं है, तो आप उसे वापस ले सकते हैं। इसके लिए आपको बैंक स्टेटमेंट, एटीएम रसीद, बैंक पासबुक, भुगतान का कोई सबूत और पहचान पत्र जैसे दस्तावेज दिखाने होंगे। यदि ये प्रमाणित हो जाता है कि पैसा चुनाव प्रभावित करने के लिए नहीं था, तो वह राशि आपको लौटाई जाती है।
अगर कोई दावा नहीं करता तो जब्त कैश का क्या होता है?
अगर जब्त कैश पर कोई दावा नहीं करता या दावा करता है लेकिन सही दस्तावेज नहीं दिखा पाता, तो वह पैसा सीधे सरकारी खजाने (Government Treasury) में जमा हो जाता है। इसके बाद उस पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। इसलिए बिहार चुनाव 2025 के नामांकन के पहले दिन से ही पुलिस और चुनाव आयोग की टीमें राज्य के कई जिलों में सक्रिय हैं और नाकाबंदी कर जांच कर रही हैं।




