नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में इंडिया गठबंधन के लिए जिन सीटों पर सबसे कड़ा मुकाबला हो सकता है, उनमें बांका विधानसभा सीट प्रमुख मानी जा रही है। यह सीट लंबे समय से बीजेपी का गढ़ बनी हुई है और आगामी चुनाव में भी आरजेडी या गठबंधन के अन्य दलों के लिए यहां से जीत दर्ज करना आसान नहीं दिख रहा है। अगर सीट INDIA गठबंधन के तहत कांग्रेस के खाते में जाती है, तो उनके लिए भी चुनौती बड़ी होगी, क्योंकि पार्टी यहां पहले ही अपनी पकड़ खो चुकी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी एनडीए उम्मीदवार को इस इलाके में मजबूत बढ़त मिली थी, जिससे इस बार की स्थिति और साफ हो गई है कि मुकाबला एकतरफा नहीं होने वाला।
बांका जिले की भौगोलिक और सामाजिक स्थिति भी इस सीट को खास बनाती है। झारखंड से सटे इस क्षेत्र में अभी भी विकास पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है। कुछ साल पहले तक नक्सल प्रभाव यहां काफी अधिक था, हालांकि अब हालात सुधर चुके हैं। इलाके में मतदान प्रतिशत हमेशा अच्छा रहा है और मतदाता समय-समय पर सत्ता परिवर्तन करते रहे हैं। इसके बावजूद इलाके की मूलभूत समस्याओं में कोई सुधार नहीं हुआ हैं। यही वजह है कि विपक्ष को यहां उम्मीद सिर्फ एंटी इनकंबेंसी से ही दिख रही है।
बांका विधानसभा का इतिहास
बांका विधानसभा सीट पर अब तक 20 बार चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 4 उपचुनाव भी शामिल हैं। सीट पर सबसे ज्यादा 8 बार जीत बीजेपी के खाते में गई है। इन आठ में से एक जीत जनसंघ के नाम से तब मिली थी, जब बीजेपी अस्तित्व में नहीं आई थी। वहीं, कांग्रेस ने इस सीट पर 7 बार जीत दर्ज की है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को अब तक 2 बार और स्वतंत्र पार्टी व जनता पार्टी को एक-एक बार यहां से जीत हासिल हुई है। रामनारायण मंडल, जो वर्तमान में विधायक हैं, ने 2014 के उपचुनाव में जीत हासिल करने के बाद से इस सीट पर अपनी पकड़ बनाए रखी है। वे इससे पहले भी तीन बार यहां से चुनाव जीत चुके हैं। यानी, वे कुल मिलाकर छह बार विधायक बन चुके हैं। अब सवाल है कि क्या रामनारायण मंडल सातवीं बार भी जनता का भरोसा जीत पाएंगे? आंकड़े और उनका राजनीतिक अनुभव यह जरूर संकेत देते हैं कि मुकाबला उनके पक्ष में हो सकता है।
बांका में किसका पलड़ा भारी?
बांका विधानसभा सीट पर इस बार भी एनडीए का पलड़ा साफ तौर पर भारी नजर आ रहा है। यहां विधानसभा चुनाव में परंपरागत रूप से बीजेपी चुनाव लड़ती है और अब तक लगातार तीन बार इस सीट पर जीत दर्ज कर चुकी है। ऐसे में पार्टी इस बार चौथी जीत के लिए पूरी ताकत झोंकने को तैयार है। वहीं, लोकसभा चुनावों में यह सीट जेडीयू के खाते में जाती रही है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता गिरधारी यादव लगातार तीन बार सांसद चुने जा चुके हैं और 2024 के आम चुनाव में भी उन्होंने इस सीट से बड़ी जीत हासिल की थी। इससे एनडीए की संगठित और मजबूत ग्राउंड मशीनरी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
दूसरी ओर, इंडिया गठबंधन के लिए इस सीट को जीतना आसान नहीं होगा। चाहे उम्मीदवार राजद से हो या कांग्रेस से, विपक्षी खेमे को यहां से जीत दर्ज करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना होगा। मजबूत एनडीए पकड़ और सीट पर स्थानीय चेहरे की लोकप्रियता को देखते हुए मुकाबला एकतरफा भले न हो, लेकिन विपक्ष को जमीनी स्तर पर जबरदस्त मेहनत करनी होगी।




