नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि उन्होंने प्रचार के दौरान मतदाताओं को पैसे बांटे, जिससे आचार संहिता का सीधा उल्लंघन हुआ। यह मामला वैशाली जिले के देसरी थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद पुलिस ने देसरी थाने में चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामले में FIR दर्ज की है। घटना से जुड़े एक वायरल वीडियो के आधार पर कार्रवाई की गई है, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
यह है मामला
पप्पू यादव पर मतदाताओं को नकद राशि बांटने के आरोपों की पुष्टि महनार के अनुमंडल पदाधिकारी नीरज कुमार ने की है। SDO ने बताया कि मामले की प्रारंभिक सूचना मिलने के बाद जांच की जिम्मेदारी सहदेई बुजुर्ग अंचल अधिकारी (CO) को सौंपी गई है। साथ ही, उन्होंने कानूनी कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, पप्पू यादव चुनाव आचार संहिता लागू रहने के बावजूद एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां उन पर नकद राशि वितरित करने का आरोप लगा है। जैसे ही घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जांच शुरू कर दी।
रिपोर्ट के बाद तय होगी कार्रवाई
पैसे बांटने के आरोपों को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। महनार के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) नीरज कुमार ने कहा कि मामला संवेदनशील है और इसमें कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने बताया कि जांच का जिम्मा सीओ को सौंपा गया है और सख्त निर्देश दिए गए हैं कि रिपोर्ट समय पर सौंपी जाए। SDO ने यह भी स्पष्ट किया कि रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की रूपरेखा तय की जाएगी।
इधर, स्थानीय प्रशासन की ओर से कहा गया है कि घटना से जुड़े दृश्य और अन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित हो। अगर पप्पू यादव पर लगे आरोप सही पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन की धाराओं में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने चेताया है कि आचार संहिता लागू रहने के दौरान ऐसी गतिविधियां गंभीर अपराध की श्रेणी में आती हैं और इसके लिए दंडात्मक प्रावधान भी तय हैं।
पप्पू यादव की अब तक नहीं आयी कोई प्रतिक्रिया
मतदाताओं को पैसे बांटने के आरोप पर सांसद पप्पू यादव की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। हालांकि, मामला सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में इस घटना को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर कड़ी आलोचना करते हुए इसे “लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन” करार दिया है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित करती हैं। वहीं दूसरी ओर, पप्पू यादव के समर्थक इस पूरे प्रकरण को “राजनीतिक साजिश” बता रहे हैं और आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं।





