नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सूबे की राजनीति में सियासी सुर अब और तेज हो गए हैं। मंगलवार को राज्य की प्रसिद्ध लोकगायिका मैथिली ठाकुर ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता लेकर नया राजनीतिक सुर छेड़ दिया। पटना में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे।
भाजपा में शामिल हुई मैथिली ठाकुर
भाजपा में शामिल होने के बाद मैथिली ठाकुर ने कहा कि राजनीति उनके लिए नया मंच है, लेकिन समाजसेवा और जनसंपर्क उनके स्वभाव का हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा, मैंने बिहार में एनडीए सरकार के कामों को देखा है। मुझे लगता है कि बिहार के विकास की यात्रा को आगे बढ़ाने में मैं भी योगदान दे सकती हूं। पार्टी मुझसे जो कहेगी, मैं वही करूंगी। चुनाव लड़ना या न लड़ना, यह पार्टी का निर्णय होगा।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, भाजपा मैथिली ठाकुर को दरभंगा जिले की अलीनगर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतार सकती है। इस सीट पर भाजपा लंबे समय से अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है, और माना जा रहा है कि मैथिली की लोकप्रियता इस सीट पर पार्टी को बढ़त दिला सकती है।
क्यों है मैथिली ठाकुर की एंट्री खास?
भाजपा का यह दांव सांस्कृतिक और भावनात्मक दोनों स्तर पर असर डालने वाला माना जा रहा है। दरअसल, मैथिली ठाकुर का नाम बिहार के लोक और शास्त्रीय संगीत जगत में एक सम्मानित पहचान रखता है। उनकी लोकप्रियता सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं, बल्कि देशभर में है। उनका नाम मैथिल, भोजपुरी, अवधी और हिंदी भाषी इलाकों में घर-घर जाना जाता है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा मैथिली ठाकुर को युवा चेहरा और सांस्कृतिक ब्रांड एंबेसडर के तौर पर पेश कर सकती है।
कौन हैं मैथिली ठाकुर?
मैथिली ठाकुर का जन्म 25 जुलाई 2000 को मधुबनी जिले के बेनीपट्टी में हुआ था। उनके पिता रमेश ठाकुर पेशे से संगीतकार हैं, जबकि माता भारती ठाकुर संगीत शिक्षिका हैं। तीनों भाई-बहन मैथिली, रिषभ और अयाची सभी संगीत में पारंगत हैं और अपने ठाकुर बंधु यूट्यूब चैनल के जरिए देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं।
11 वर्ष की उम्र में गढ़ी पहचान
‘इंडियन आइडल जूनियर’ और ‘राइजिंग स्टार’ जैसे राष्ट्रीय स्तर के रियलिटी शो में अपनी प्रतिभा दिखाकर उन्होंने लाखों दिल जीते। बाद में उन्होंने लोकसंगीत, देवी गीत और राष्ट्रभक्ति गीतों से सोशल मीडिया पर अपार लोकप्रियता हासिल की।
राजनीति में एंट्री की चर्चा पहले से थी
बीते कुछ महीनों से मैथिली ठाकुर की राजनीतिक पारी की चर्चा जोर पकड़ रही थी। उन्होंने कुछ समय पहले भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात की थी। उसी मुलाकात के बाद यह कयास लगने लगे थे कि मैथिली ठाकुर अब राजनीति में उतरने की तैयारी में हैं। अब जब उन्होंने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ले ली है, तो तस्वीर साफ हो गई है।
‘भाजपा को ‘संस्कृति और युवाओं’ से जोड़ने की रणनीति’
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा आने वाले बिहार चुनाव में “संस्कृति और युवा चेहरों” को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
मैथिली ठाकुर जैसी कलाकार पार्टी के इस अभियान में फिट बैठती हैं।
उनकी छवि साफ-सुथरी, पारिवारिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ी हुई है, जो ग्रामीण मतदाताओं और महिलाओं के बीच गहरी पैठ बना सकती है।
भाजपा संगठन यह भी मानता है कि मैथिली ठाकुर का जुड़ना दरभंगा और मिथिला क्षेत्र में पार्टी के जनाधार को मजबूत करेगा।





