नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार में विधानसभा चुनाव की हलचल तेज हो गई है। पटना में जेडीयू कार्यालय पर पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार की साझा तस्वीर ने सियासी भूचाल ला दिया है। एक तरफ बीजेपी और जेडीयू इसे एनडीए की एकजुटता का प्रतीक बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ आरजेडी ने इस पर तीखा हमला बोला है।
क्या नीतीश अब साइड हीरो बन गए?
जेडीयू दफ्तर में पीएम मोदी की तस्वीर के साथ लगे नारों में लिखा गया,”महिलाओं की जय-जयकार, फिर से एनडीए सरकार” और “लग रहे उद्योग, मिल रहा रोजगार”, जो एनडीए की विकास नीति को दर्शाता है। लेकिन इसने ये सवाल भी खड़ा कर दिया कि क्या अब बिहार चुनाव मोदी के चेहरे पर लड़ा जाएगा और नीतीश कुमार केवल सहयोगी की भूमिका में होंगे?
आरजेडी ने उठाए सवाल, कहा- विलय हो चुका है
आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने तंज कसते हुए कहा, “अब जेडीयू दफ्तर में पीएम मोदी की तस्वीर लग गई है, जल्द ही बीजेपी का झंडा और फिर RSS की शाखा भी लग जाएगी।” उन्होंने दावा किया कि जेडीयू अब पूरी तरह बीजेपी में विलीन हो चुकी है। वहीं, तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार को “मजबूर मुख्यमंत्री” बताया। वरिष्ठ पत्रकार संजीव पांडेय मानते हैं कि जेडीयू अब खुलकर एनडीए की मुख्यधारा में आ गया है। उन्होंने कहा, “पहली बार ऐसा हुआ है कि जेडीयू जैसे स्वतंत्र छवि वाली पार्टी ने अपने दफ्तर पर सहयोगी दल के नेता की तस्वीर लगाई है। यह एनडीए के भीतर ‘मेन हीरो’ और ‘साइड हीरो’ की भूमिका को साफ दिखाता है।
बीजेपी का जवाब – नीतीश ही होंगे चेहरा
बीजेपी की तरफ से उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ किया है कि नीतीश कुमार ही एनडीए के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। बावजूद इसके, पीएम मोदी की तस्वीर और उनकी आगामी रैलियों से साफ है कि बीजेपी इस चुनाव में मोदी के चेहरे और राष्ट्रवाद के एजेंडे पर ही दांव खेलने जा रही है। 2024 लोकसभा चुनाव में बिहार में एनडीए ने 40 में से 39 सीटें जीती थीं। उस वक्त भी मोदी का चेहरा बड़ा फैक्टर रहा था। 2025 में भी बीजेपी वही रणनीति दोहरा सकती है। नीतीश कुमार अब विकास और प्रशासन के प्रतीक तो रहेंगे, लेकिन जनता तक पहुंचने के लिए मोदी की लोकप्रियता का सहारा लिया जाएगा। बिहार में चुनावी घमासान अब ‘हीरो बनाम साइड हीरो’ के मोड़ पर आ गया है। पोस्टर की एक तस्वीर ने गठबंधन राजनीति को नया रंग दे दिया है।




